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यूनियन बजट की बदलती तारीख और समय: ब्रिटिश विरासत से आधुनिक भारत तक का सफर

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Union Budget: संसद में 1 फरवरी को आम बजट का पेश होना आज एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तारीख और समय हमेशा से ऐसा नहीं था? इसके पीछे एक गहरा इतिहास और भारत की बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं की कहानी छिपी है। एक समय था जब यह 28 फरवरी को पेश होता था, फिर यह शाम 5 बजे आता था। इन बदलावों ने देश की Financial Policy और शासन संचालन को कैसे प्रभावित किया, आइए जानते हैं।

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यूनियन बजट: 28 फरवरी से 1 फरवरी तक का सफर

साल 2017 से पहले, देश में आम बजट हर साल फरवरी के आखिरी दिन पेश करने की पुरानी परंपरा थी। यह अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही एक व्यवस्था थी, जिसमें माना जाता था कि बजट पेश होने के बाद 1 अप्रैल से उसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता था। हालांकि, जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा विकसित हुआ, इस व्यवस्था में कई दिक्कतें आने लगीं। बजट पेश होने और उसके लागू होने के बीच का समय नई योजनाओं के लिए कम पड़ने लगा, जिससे राज्यों और मंत्रालयों को तैयारी करने में परेशानी होती थी। कई बार तो आवश्यक फाइलें भी समय पर पूरी नहीं हो पाती थीं, जिससे विकास परियोजनाओं में देरी होती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इन चुनौतियों को देखते हुए, साल 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट की तारीख बदलने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके बाद से आम बजट को फरवरी की शुरुआत में, यानी 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा। इस बदलाव से केंद्र और राज्यों को नई योजनाओं को सही ढंग से लागू करने के लिए लगभग दो महीने का अतिरिक्त समय मिलने लगा। इस सुधार ने न केवल नई परियोजनाओं पर काम को सुगम बनाया, बल्कि ब्रिटिश काल से चली आ रही एक पुरानी और अव्यवहारिक परंपरा का भी अंत कर दिया।

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बजट के समय में बदलाव: शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक

केवल तारीख ही नहीं, बजट पेश करने के समय में भी एक बड़ा बदलाव किया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में साल 1999 में बजट पेश करने के समय से जुड़ी पुरानी परंपरा में सुधार किया गया। उस समय तक बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह व्यवस्था भी ब्रिटिश राज के प्रभाव के कारण थी, क्योंकि ब्रिटेन में बजट सुबह 11 बजे आता था, और भारत में उस समय के अनुरूप शाम 5 बजे का चुनाव किया गया था।

तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस व्यवस्था को बदलते हुए बजट को सुबह 11 बजे पेश करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उनका तर्क था कि यदि बजट दिन की शुरुआत में आता है, तो सांसदों, विशेषज्ञों और आम जनता को इसे गहराई से समझने और इस पर पूरे दिन चर्चा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा देता है। तभी से, भारत में आम बजट सुबह 11 बजे ही संसद में प्रस्तुत किया जा रहा है।

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यह बदलाव न केवल प्रशासनिक दक्षता के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह एक आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत की सोच को भी दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इन परिवर्तनों ने भारत के आर्थिक कैलेंडर को अधिक सुव्यवस्थित किया है और Financial Policy के कार्यान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया है। यह दर्शाता है कि कैसे देश ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पुरानी प्रथाओं को त्यागा और नई, अधिक कुशल प्रणालियों को अपनाया।

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