Real Estate: केंद्रीय बजट 2026 से पहले, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर नीतिगत निरंतरता और महत्वपूर्ण सुधारों की उम्मीद कर रहा है। इन सुधारों से आवासीय मांग को बल मिलने और शहरी विकास को नई गति मिलने की संभावना है। बीते कुछ समय में अंतिम-उपभोक्ता मांग में वृद्धि, बेहतर सामर्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण इस सेक्टर में स्थिर वृद्धि देखी गई है। ऐसे में, डेवलपर्स का मानना है कि आगामी बजट रियल एस्टेट के अगले विकास चरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
# रियल एस्टेट सेक्टर की बजट 2026 से उम्मीदें: घर खरीदारों को मिलेगी राहत?

## रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख मांगें और संभावित समाधान
इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को आवास को आर्थिक विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में देखना जारी रखना चाहिए। यह विशेष रूप से ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ब्याज दरें स्थिर हैं और घर खरीदारों का विश्वास बरकरार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सेक्टर की प्रमुख मांगों में घर खरीदारों के लिए टैक्स बेनिफिट्स बढ़ाना, निर्माणाधीन संपत्तियों पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाना, और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर व किफायती आवास के लिए बजट आवंटन में वृद्धि शामिल है।
रियल एस्टेट सेक्टर की एक बड़ी अपेक्षा होम लोन पर ब्याज छूट (धारा 24(b)) की सीमा बढ़ाने को लेकर है। बीते कुछ वर्षों में प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में हुई वृद्धि को देखते हुए, डेवलपर्स का मानना है कि टैक्स कटौती बढ़ाने से अंतिम-उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और पहली बार घर खरीदने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर स्पष्टता और निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी दरों में संभावित कमी से हाउसिंग सेक्टर में मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
गंगा रियल्टी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग ने बजट से जुड़ी उम्मीदों पर बात करते हुए कहा, “आगामी केंद्रीय बजट हाउसिंग सेक्टर में अंतिम-उपभोक्ता मांग को और मजबूत करने का एक अवसर है। हमें उम्मीद है कि सरकार होम लोन पर ब्याज और मूलधन भुगतान पर टैक्स छूट बढ़ाने पर विचार करेगी, जो लंबे समय से अपरिवर्तित है। बायर-सेंट्रिक नीतियां और नीति में स्थिरता, खासकर गुरुग्राम जैसे हाई-ग्रोथ मार्केट्स में, मौजूदा सकारात्मक रुझान को बनाए रखने में मदद करेंगी, जहां मांग मुख्य रूप से वास्तविक खरीदारों से आ रही है।”
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण फोकस एरिया बना हुआ है। हाईवे, मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में लगातार हो रहे निवेश से उभरते इलाकों में रियल एस्टेट की संभावनाएं काफी बेहतर हुई हैं। डेवलपर्स का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता कैपेक्स न केवल हाउसिंग डिमांड बढ़ाएगा, बल्कि कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट को भी सपोर्ट करेगा। गर्ग ने आगे कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से कनेक्टिविटी बेहतर होती है, जिससे शहरों की लिवेबिलिटी और निवेश आकर्षण बढ़ता है, जो डेवलपर्स और खरीदारों दोनों के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आता है।
## किफायती आवास और शहरी विकास पर फोकस
रियल एस्टेट देश की आर्थिक वृद्धि का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है और बजट के जरिए हाउसिंग डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को और तेज किया जा सकता है। हमें किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग के लिए प्रोत्साहनों के जारी रहने और ऐसी नीतियों की उम्मीद है, जो प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता को बेहतर बनाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कंप्लायंस प्रक्रिया को सरल बनाना और संस्थागत फाइनेंसिंग तक बेहतर पहुंच डेवलपर्स को क्वालिटी प्रोजेक्ट्स समय पर डिलीवर करने में मदद करेगी, साथ ही खरीदारों के लिए कीमतें भी प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
सरांश त्रेहान ने यह भी कहा कि स्थिर नीतिगत माहौल और दीर्घकालिक विजन निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि स्पष्ट टैक्स नीतियां और निरंतर शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के निवेशकों को भारतीय हाउसिंग सेक्टर की ओर आकर्षित किया जा सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







