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मार्च, 13, 2026
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Ishan Kishan comeback: ईशान किशन…, उम्मीदें नाचती हैं हर शॉट पर, 32 गेंद, असली दम! क्यों लोगों को डबल स्टैंडर्ड लगा?

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Ishan Kishan comeback: क्रिकेट के मैदान में वापसी अक्सर किसी पुराने दोस्त के लौटने जैसी होती है, जहां हर गेंद पर उम्मीदें नाचती हैं और हर शॉट पर तालियां बजती हैं। लेकिन कुछ वापसी ऐसी होती हैं, जो सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक कहानी कहती हैं, अनुशासन, टैलेंट और वापसी की जिद की कहानी।

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भारतीय क्रिकेट के युवा सनसनी ईशान किशन ने टी20 क्रिकेट में धमाकेदार वापसी कर सबको चौंका दिया है। अपने कमबैक के दूसरे ही टी20 मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 32 गेंदों में 76 रनों की आक्रामक पारी खेली, जिसमें 11 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड पहले से ही उनके नाम दर्ज है, ऐसे में सवाल उठता है कि टीम का यह लाडला खिलाड़ी आखिर दो साल तक राष्ट्रीय टीम से बाहर क्यों था?

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Ishan Kishan comeback: क्या था ईशान के टीम से बाहर होने का असल कारण?

ईशान किशन को टीम इंडिया से बाहर इसलिए रखा गया था, क्योंकि उन्होंने 2023 के अंत में मानसिक स्वास्थ्य के चलते ब्रेक लिया था। इसके बाद, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के स्पष्ट निर्देश के बावजूद, उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलने से इनकार कर दिया था। चयनकर्ताओं को लगा कि वह टीम की प्राथमिकताओं और अनुशासन का पालन नहीं कर रहे हैं, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, बाद में उन्होंने घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में शानदार प्रदर्शन किया, जिसके आधार पर उनकी राष्ट्रीय टीम में वापसी हुई।

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सीनियर खिलाड़ियों पर दोहरा मापदंड क्यों?

इस पूरे प्रकरण में एक सवाल बार-बार उठ रहा था कि जब ईशान किशन और श्रेयस अय्यर को घरेलू क्रिकेट न खेलने के कारण टीम से बाहर कर दिया गया, तो रोहित शर्मा, विराट कोहली और हार्दिक पांड्या जैसे सीनियर खिलाड़ियों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? बाहर से देखने पर यह “दोहरे मापदंड” जैसा प्रतीत होता है, लेकिन चयन समिति का इस पर अपना तर्क था।

ईशान किशन का धमाकेदार कमबैक

किशन टीम इंडिया से बाहर इसलिए थे क्योंकि उन्होंने 2023 के अंत में मेंटल ब्रेक लिया और इसके बाद BCCI के निर्देश के बावजूद घरेलू क्रिकेट नहीं खेला।चयनकर्ताओं को लगा कि वे टीम की प्राथमिकता और अनुशासन का पालन नहीं कर रहे। बाद में उन्होंने घरेलू क्रिकेट और IPL में अच्छा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के आधार पर उनकी वापसी हुई।

क्यों लोगों को डबल स्टैंडर्ड लगा?

ईशान किशन और श्रेयस अय्यर बाहर हुए तो रोहित, विराट और हार्दिक क्यों नहीं ? बाहर से देखने पर यह डबल स्टैंडर्ड जैसा लगता है।
लेकिन हमें समझना होगा कि ईशान न ही घायल थे न ही इंटरनेशनल मैच खेल रहे थे। फिर भी रणजी नहीं खेलने पर बाहर किए गए। वहीं रोहित, विराट जैसे सीनियर रणजी नहीं खेले लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चयन समिति ने कहा कि “स्थिति अलग है, नियम नहीं।” रोको वर्क लोड के कारण रणजी नहीं खेल रहे।
तकनीकी तौर पर चयन समिति भले ही सही हो लेकिन नैरेटिव और मैसेजिंग में कन्फ्यूजन रहा, जिससे डबल स्टैंडर्ड की धारणा बनी। न्याय के बजाय प्रबंधन हावी रहा और यही बात फैंस को खटकी।
प्रशंसकों का कहना था कि बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद ईशान को बेंच पर बैठाकर रखा गया था। जिस वजह से उन्हें मेंटल ब्रेक लेना पड़ा। इससे बड़ी बात यह कि क्या ईशान जैसे टैलेंट के साथ मुसीबत में हैंड होल्ड करेंगे या छोड़ देंगे। किशन बैटिंग में जितने आक्रामक हैं ड्रेसिंग रूम में उतने ही मजाकिया। माहौल खुशनुमा कर देते हैं।

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हमें यह समझना होगा कि ईशान किशन उस समय न तो चोटिल थे और न ही अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे थे। इसके बावजूद, रणजी ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट न खेलने पर उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। वहीं, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने भी रणजी नहीं खेला, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चयन समिति ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि “स्थिति अलग है, नियम नहीं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके अनुसार, सीनियर खिलाड़ी ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ के तहत रणजी नहीं खेल रहे थे।

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तकनीकी रूप से देखें तो चयन समिति का तर्क सही हो सकता है, लेकिन इस मामले में नैरेटिव और मैसेजिंग में बड़ा भ्रम पैदा हुआ, जिससे प्रशंसकों के बीच दोहरे मापदंड की धारणा मजबूत हुई। फैंस का मानना था कि न्याय के बजाय, प्रबंधन और अलग-अलग खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग नियम हावी रहे, और यही बात उन्हें अखरती रही।

प्रशंसकों का यह भी कहना था कि बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद ईशान किशन को लंबे समय तक बेंच पर बिठाकर रखा गया था, जिस वजह से उन्हें मानसिक ब्रेक लेने की आवश्यकता महसूस हुई। इससे भी बड़ी बात यह है कि क्या ईशान जैसे प्रतिभाशाली और युवा खिलाड़ी के साथ मुश्किल समय में बोर्ड को ‘हैंड होल्ड’ करना चाहिए या उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए? ईशान किशन बल्लेबाजी में जितने आक्रामक हैं, ड्रेसिंग रूम में उतने ही मजाकिया स्वभाव के हैं, जो टीम के माहौल को खुशनुमा बनाए रखते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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