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मार्च, 1, 2026
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राम नवमी 2026: प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव का पावन पर्व

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Ram Navami 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि सनातन धर्म में अत्यंत पावन मानी जाती है। यह वह शुभ दिन है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने अयोध्या नगरी में जन्म लेकर समस्त सृष्टि को आनंदित किया था। प्रतिवर्ष यह पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, और इस विशेष अवसर पर भक्तगण भगवान राम की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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राम नवमी 2026: प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव का पावन पर्व

राम नवमी 2026 कब है और क्यों महत्वपूर्ण है?

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्री राम के प्राकट्य दिवस का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या के राजा दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान राम ने जन्म लिया था। उनके जन्मोत्सव की खुशी में यह पर्व देशभर में धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने, पूजा-अर्चना करने और भजन-कीर्तन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस वर्ष भी भक्तगण प्रभु श्री राम की कृपा पाने के लिए तैयार हैं। राम नवमी का यह पावन दिन हर साल एक विशेष ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है, जिसमें भगवान राम के आदर्शों और उनके जीवन मूल्यों को याद किया जाता है। इसका ‘शुभ मुहूर्त’ जानना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए आवश्यक है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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भगवान श्री राम के जन्मोत्सव की कथा

भगवान राम का जन्म अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ था। राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर पुत्रकामेष्टि यज्ञ करना पड़ा था। यज्ञ के परिणामस्वरूप, अग्नि देव ने स्वयं प्रकट होकर उन्हें खीर प्रदान की, जिसे दशरथ ने अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांटा। इसी खीर के प्रभाव से चैत्र शुक्ल नवमी के दिन अभिजित मुहूर्त में माता कौशल्या ने राम को, कैकेयी ने भरत को, और सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें धर्म, न्याय और त्याग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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राम नवमी 2026 पूजा विधि

राम नवमी के दिन भगवान श्री राम की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। यह पूजा प्रातः काल से ही आरंभ हो जाती है और मध्याह्न काल में जन्मोत्सव का विशेष पूजन किया जाता है।

  • प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
  • भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • तुलसी दल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) अवश्य चढ़ाएं।
  • विशेष रूप से, मध्याह्न काल में (जब भगवान राम का जन्म हुआ था) श्री राम के बाल स्वरूप का पूजन करें। उन्हें झूले में झुलाएं और पालना गीत गाएं।
  • आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।
  • पूरे दिन रामचरितमानस का पाठ करना या ‘राम’ नाम का जप करना अत्यंत फलदायी होता है।
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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

राम नवमी 2026 का शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में राम नवमी का पर्व 29 मार्च, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विवरणसमय
नवमी तिथि आरंभ28 मार्च 2026, रात 09:21 बजे
नवमी तिथि समाप्त29 मार्च 2026, शाम 06:40 बजे
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त29 मार्च 2026, सुबह 11:24 बजे से दोपहर 01:54 बजे तक
अवधि2 घंटे 30 मिनट
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यह शुभ मुहूर्त भगवान श्री राम की विशेष पूजा-अर्चना और जन्मोत्सव मनाने के लिए अति उत्तम है। इस दौरान किए गए सभी धार्मिक कार्य और पूजा-पाठ विशेष फल प्रदान करते हैं। यह ‘शुभ मुहूर्त’ आपको पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है।

भगवान राम का महामंत्र

श्री राम जय राम जय जय राम।

निष्कर्ष एवं उपाय

राम नवमी का यह पावन पर्व हमें भगवान श्री राम के आदर्श जीवन, उनके त्याग, प्रेम और धर्मपरायणता की याद दिलाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से न केवल भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन यदि संभव हो तो किसी राम मंदिर में जाकर दर्शन करें या घर पर ही सुंदरकांड का पाठ करें। गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान श्री राम की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

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