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दरभंगा से खुली बिहार के मेडिकल कॉलेजों की पोल! DMCH में 50% छात्र फेल, NMC ने दी चेतावनी, पढ़ाई और इलाज दोनों ठप, क्या है वजह?

Bihar Medical College: पटना, दरभंगा और नालंदा मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भारी कमी से एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज दोनों प्रभावित हो रहा है। डीएमसीएच में 50% छात्र फेल हुए, अब चिकित्सक संगठनों ने नियमित नियुक्ति कैलेंडर की मांग की है।

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Bihar Medical College: बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भारी कमी के कारण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। पटना समेत राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पद छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों के इलाज पर भी सीधा असर डाल रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने भी चेतावनी जारी की है, लेकिन इसके बावजूद पदों को भरने की प्रक्रिया धीमी है।

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असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी से दोहरी मार

असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। वर्तमान में उनकी कमी के चलते एमबीबीएस और पीजी छात्रों की कक्षाएं बाधित हो रही हैं, वहीं ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं भी लड़खड़ा रही हैं। इस दोहरी मार का खामियाजा छात्रों और आम मरीजों दोनों को भुगतना पड़ रहा है।

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चिकित्सक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से अविलंब नियमित नियुक्ति का कैलेंडर जारी करने की मांग की है।

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छात्रों का खराब प्रदर्शन और एनएमसी की चेतावनी

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा में करीब 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के फेल होने का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) और नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) के छात्र-छात्राओं ने इस खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी को बताया है। एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को चेतावनी दी है कि यदि वे निर्धारित मापदंडों के अनुसार शिक्षकों की संख्या पूरी नहीं करते हैं, तो उनकी मान्यता पर संकट आ सकता है।

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पीएमसीएच में इमरजेंसी सेवाओं को सुधारने के प्रयास

पीएमसीएच में इमरजेंसी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 50 मेडिकल अफसर और 150 सीनियर रेजिडेंट की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। हालांकि, यह कदम केवल इमरजेंसी सेवाओं को दुरुस्त करने पर केंद्रित है, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी से शिक्षण और अन्य विशिष्ट सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर करने के लिए अभी भी व्यापक समाधान की आवश्यकता है। चिकित्सक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को तत्काल एक नियमित नियुक्ति कैलेंडर जारी करना चाहिए ताकि इन महत्वपूर्ण पदों को समय पर भरा जा सके और चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाया जा सके।

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