
Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक नाटकीय घटनाक्रम में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित और तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। एक दिन पहले, 2022 के बाद पहली बार उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, यह गिरावट बाजार के लिए एक बड़ा आश्चर्य थी। सवाल उठता है कि इस अचानक बदलाव के पीछे क्या कारण है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका क्या असर होगा? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price धड़ाम: क्या ट्रंप के बयान से पलटा खेल?
मंगलवार को, मिडिल ईस्ट के तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट के संभावित बंद होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल इंट्राडे में 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिसने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी थीं। हालांकि, अगले ही दिन सुबह इसमें लगभग 10.17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 85.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा।
यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कारोबारी सत्र में तेल की कीमतें साल 2022 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। इस अचानक आई नरमी ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन इसके पीछे के कारणों को समझना बेहद जरूरी है।
Crude Oil Price में रिकॉर्ड गिरावट के पीछे क्या है कारण?
तेल की कीमतों में इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव जल्द ही खत्म हो सकता है। इन संकेतों के बाद बाजार में नरमी का रुख देखने को मिला। इसी दौरान, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 10.06 प्रतिशत गिरकर 85.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाक्रमों के बीच व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है, जिसे मौजूदा हालात को शांत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
घरेलू एलपीजी आपूर्ति: तेल कंपनियों की प्राथमिकता
भारत पेट्रोलियम ने इस बीच एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि घरों में गैस की कमी न हो। इस चुनौती से निपटने के लिए एलपीजी उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही, अस्पताल, स्कूल और अन्य आवश्यक संस्थानों को भी उनकी जरूरत के हिसाब से एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी।
गैर-घरेलू सेक्टर की एलपीजी मांग को देखने के लिए इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों सहित प्रमुख तेल कंपनियों की एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति यह तय करेगी कि किस सेक्टर को कितनी एलपीजी की आपूर्ति की जाए, क्योंकि गैर-घरेलू एलपीजी की आपूर्ति काफी हद तक आयात पर निर्भर करती है और मौजूदा वैश्विक स्थितियों में हर मांग को पूरा करना संभव नहीं होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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