
Darbhanga News: संकट जब दरवाज़े पर दस्तक देता है, तो जुगाड़ और जज्बा ही सबसे बड़ा हथियार बनता है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां गैस सिलेंडर खत्म होने की कगार पर हैं, लेकिन मरीजों की थाली खाली न होने देने का संकल्प अडिग है।
Darbhanga News: DMCH में गैस खत्म, पर नहीं रुकेगी 700 मरीजों की थाली! B-Plan तैयार, अब कोयले-लकड़ी पर पकेगा खाना
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अस्पताल की रसोई में गैस की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद, किसी भी मरीज का नाश्ता या भोजन नहीं रुकेगा। जीविका कैंटीन प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन ने एक वैकल्पिक ‘बी-प्लान’ तैयार कर लिया है, जिसके तहत हर हाल में मरीजों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
जीविका की डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने दृढ़ता से कहा, “हम लकड़ी, कोयला और ईंट पर खाना पकाएंगे, मगर मरीजों को खिलाएंगे। किसी भी सूरत में डीएमसीएच के मरीजों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।” यह संकल्प उस गंभीर स्थिति के बीच आया है, जहां रसोई गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है।
Darbhanga News: वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ईंट-कोयले का सहारा
कैंटीन प्रबंधक अभिषेक मिश्रा ने बताया कि अगर गैस सिलेंडर की आपूर्ति समय पर सुचारू नहीं होती है, तो भोजन बनाने में कोई व्यवधान नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि ‘बी-प्लान’ पूरी तरह तैयार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके लिए डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र से परिसर में एक अलग स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, जहां ईंट जोड़कर अस्थायी चूल्हा बनाया जाएगा और उस पर लकड़ी-कोयले की मदद से खाना पकेगा।
हालांकि, इस गैस संकट का असर भोजन की थाली पर थोड़ा जरूर दिखा है। अस्पताल के विभिन्न वार्डों, जैसे औषधि विभाग, सर्जरी विभाग और ऑर्थो विभाग में भर्ती मरीजों ने बताया कि उन्हें सुबह का नाश्ता और भोजन तो मिला, लेकिन उसमें रोटी शामिल नहीं थी। केवल दाल, चावल और सब्जी ही परोसी गई। रोटी न मिलने से विशेषकर मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, जिलाधिकारी को दी गई सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन और जीविका प्रबंधन पूरी तरह सक्रिय है। डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि उच्चाधिकारियों और जिलाधिकारी से लगातार बातचीत चल रही है। आर.जे. भवानी गैस एजेंसी से भी संपर्क साधा जा रहा है ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल हो सके। इस संबंध में जिलाधिकारी को लिखित रूप से भी अवगत करा दिया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
शुक्रवार को स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ जब कैंटीन को कुछ सिलेंडर उपलब्ध कराए गए, जिससे फिलहाल भोजन बनाने का काम चल रहा है। लेकिन यह एक अस्थायी समाधान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अस्पताल में दिन और रात मिलाकर लगभग 600 से 700 मरीजों का खाना बनता है, और इतनी बड़ी संख्या के लिए निर्बाध आपूर्ति आवश्यक है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक बी-प्लान को स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

