
Sonam Wangchuk: रेगिस्तान की तपती जेल की दीवारें भी लद्दाख के बुलंद हौसलों को कैद न कर सकीं। करीब 170 दिनों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आखिरकार जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उनके ऊपर लगाए गए सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।
Sonam Wangchuk पर क्यों लगा था NSA?
मामला पिछले साल का है, जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग ने जोर पकड़ा था। इसी सिलसिले में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। लद्दाख प्रशासन ने हिंसा भड़काने के आरोप में 24 सितंबर 2023 को सोनम वांगचुक को हिरासत में ले लिया था। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया। उन पर लगे आरोप गंभीर थे, क्योंकि इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम और následným Ladakh protest के कारण केंद्र सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार की ओर से यह फैसला एक महत्वपूर्ण समय पर आया है। दरअसल, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने पति की हिरासत को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिस पर 17 मार्च को सुनवाई होनी थी। इस सुनवाई से ठीक पहले गृह मंत्रालय ने NSA हटाने का निर्णय ले लिया। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास के माहौल को फिर से बनाने के लिए उठाया गया है। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लद्दाख के लोगों की सभी मांगों और आकांक्षाओं को बातचीत के माध्यम से हल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रिहाई के बाद संघर्ष जारी रखने का ऐलान
जेल से बाहर आते ही सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संदेश दिया। उन्होंने साफ किया कि वे अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने लिखा, “मैं सक्रियता से पीछे नहीं हटा हूं। हमारा संघर्ष लद्दाख की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए था और आगे भी रहेगा।” उनके इस बयान से स्पष्ट है कि लद्दाख की मांगों को लेकर उनकी लड़ाई भविष्य में भी जारी रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वांगचुक की रिहाई को लद्दाख में उनके समर्थकों के बीच एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली दौर की बातचीत पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उनकी रिहाई से संवाद का कोई नया और सकारात्मक रास्ता खुलता है या फिर जमीनी स्तर पर संघर्ष की रूपरेखा बदलती है।






