
Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत माना जाता है। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं, जिसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आगामी 16 मार्च 2026 को सोम प्रदोष व्रत का पावन संयोग बन रहा है। यदि आप इस व्रत को पहली बार करने जा रही हैं या भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहती हैं, तो यह आवश्यक है कि आप संपूर्ण पूजा विधि और आवश्यक सामग्री के बारे में विस्तार से जान लें। इससे आपकी पूजा निर्विघ्न रूप से संपन्न होगी और आपको महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
Pradosh Vrat 2026: जानिए प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Pradosh Vrat 2026: पूजन सामग्री की विस्तृत सूची
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव अपने कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस दिन विधि-विधान से की गई शिव पूजा अनंत फल प्रदान करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पवित्र अवसर पर भगवान शंकर की आराधना से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना की जाती है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को पड़ता है, और संध्याकाल को प्रदोष काल कहा जाता है, जो पूजा के लिए सर्वोत्तम समय होता है। इस व्रत को करने से चंद्र दोष, पितृ दोष और अन्य कई प्रकार के ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
**पूजन सामग्री:**
* पुष्प (सफेद, लाल)
* धूप, दीप, अगरबत्ती
* बेलपत्र
* धतूरा, भांग
* शमी पत्र
* सफेद चंदन
* गंगाजल
* कच्चा दूध
* दही, घी, शहद, शकर (पंचामृत हेतु)
* जनेऊ
* अक्षत (बिना टूटे चावल)
* वस्त्र (भगवान शिव और माता पार्वती के लिए)
* फल
* मिठाई (विशेषकर खीर या मालपुआ)
* पान, सुपारी
* लौंग, इलायची
* पुष्पमाला
* दक्षिणा
* आसन
* कलश
**सोम प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि:**
* सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी को गंगाजल से शुद्ध करें।
* हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
* पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान शिव का स्मरण करें।
* संध्याकाल (प्रदोष काल) में पुनः स्नान करें।
* एक साफ चौकी पर शिव परिवार की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
* दीपक जलाएं और धूप, दीप प्रज्वलित करें।
* सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
* भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं (दूध, दही, घी, शहद, शकर)।
* इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं।
* भगवान शिव को चंदन का लेप लगाएं, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
* माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री और लाल पुष्प अर्पित करें।
* जनेऊ और वस्त्र अर्पित करें।
* फल, मिठाई, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा चढ़ाएं।
* भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
* प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
* अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
**प्रदोष व्रत 2026 (सोम प्रदोष) शुभ मुहूर्त:**
| तिथि | विवरण |
| :————- | :———————– |
| व्रत का दिन | सोमवार, 16 मार्च 2026 |
| त्रयोदशी तिथि आरंभ | 16 मार्च 2026, शाम 04:30 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 17 मार्च 2026, शाम 04:00 बजे |
| प्रदोष काल | 16 मार्च 2026, शाम 06:15 बजे से रात 08:30 बजे तक |
| पूजा का सर्वोत्तम समय | 16 मार्च 2026, शाम 06:15 बजे से रात 08:30 बजे तक |
प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से शिव पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति, रोगों से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि के लिए भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
भगवान शिव की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी होता है:
ॐ नमः शिवाय।
या
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इस प्रकार, 16 मार्च 2026 को पड़ने वाले सोम प्रदोष व्रत पर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कर आप उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। व्रत के दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रदोष व्रत के पुण्य से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें




