
बागमती नदी बाढ़: प्रकृति का रौद्र रूप जब धरती पर उतरता है, तो नदियां अपनी मर्यादा भूल जाती हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। दो दिनों की मूसलाधार बारिश ने बागमती नदी में ऐसी जान फूंकी है कि उसकी बेजान धाराएं अब उफान पर हैं, और किनारों पर तबाही का मंजर दिखने लगा है।
जानकारी के अनुसार दो दिनों की बारिश से शिवहर में बागमती नदी में उफान आ गया।नदी के किनारे हजारों एकड़ में लगी तरबूज, खरबूज, खीरा और परवल आदि फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई है। पुरनहिया प्रखंड के अदौरी, कटैया, पिपराही और पिपराही प्रखंड के बेलवा, इंदरवा नरकटिया माधवपुर व पिपराही सहित दर्जनों गांव में बागमती नदी की रेट पर हजारों एकड़ में लगी फैसले बर्बाद हो गई है।
बागमती नदी बाढ़ का जलस्तर तेजी से बढ़ा
रविवार को बागमती नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया, जिससे उसकी तेज धाराएं अब खेतों की ओर रुख कर चुकी हैं। नदी का पानी तेजी से फैल रहा है और हजारों एकड़ में लगी तरबूज, खरबूज, खीरा जैसी मूल्यवान फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं, क्योंकि यह उनके साल भर की मेहनत का नतीजा था जो अब पानी में डूब रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी
पिछले कुछ दिनों की लगातार बारिश ने निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है और नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इस अचानक आई बाढ़ से न सिर्फ खरीफ की बुवाई पर असर पड़ेगा, बल्कि वर्तमान में खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुंचा है। हजारों एकड़ में लगी तरबूज, खरबूज और खीरे की खेती पूरी तरह से डूब चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई किसानों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इन फसलों में लगा दी थी, और अब उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे ये किसान अब केवल भगवान भरोसे हैं।






