
Parliament News: जब संसद के गलियारे जन सरोकारों से गूंज उठे, और हर आवाज में देश के दूरस्थ कोनों की उम्मीदें सुनाई दीं, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र अपने सबसे मुखर रूप में है। सोमवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा, जब सांसदों ने जनता से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।
Parliament News: संसद में गूंजी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय, मातृत्व अवकाश सहित कई जनहितैषी मांगें
Parliament News: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और मातृत्व अवकाश का मुद्दा
सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद ने संसद में देश भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए समान मानदेय और 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की मांग की। लोकसभा के शून्यकाल में भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए बताया कि देश में लगभग 12 लाख 93 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं।
उन्होंने इन कार्यकर्ताओं के लिए एक समान वेतन की वकालत करते हुए कहा, ‘‘उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, उन्हें विभिन्न राज्यों में मानदेय के रूप में छह हजार, आठ हजार या दस हजार रुपये मिल रहे हैं।’’ पाल ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि चूंकि ये कार्यकर्ता राष्ट्रीय योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने का काम कर रही हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसलिए उन्हें नियमित करने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वर्तमान में मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से इन्हें भी इस कानून के तहत 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने की मांग की। ये सांसदों की मांगें दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन कार्यकर्ताओं की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
संसद में उठे विभिन्न संसदीय क्षेत्रों के अहम मुद्दे
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद नारायणदास अहिरवार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र जालौन (उत्तर प्रदेश) में बसौर-बरार समुदाय के लोगों की संख्या शून्य घोषित किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस कारण समुदाय के लोग सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘छह जुलाई 2024 को परियोजना निदेशक द्वारा (उप्र) शासन को भेजे गए पत्र में यह उल्लेख किया गया कि जिले में इस जाति के लोगों की संख्या शून्य है। वहीं, जब इस संबंध में परियोजना निदेशक से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि नौ विकास खंड अधिकारियों ने लिखित रूप से सूचित किया है कि उनके क्षेत्र में बसौर-बरार जाति के लोग निवास नहीं करते।’’ सपा सांसद ने इसे सत्य से परे और एक समुदाय विशेष के प्रति गहरी उपेक्षा व संवेदनहीनता का प्रतीक बताया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि इस कारण मुख्यमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण लाभ से समुदाय के पात्र लोग वंचित हो गए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। उन्होंने जालौन जिले में समुदाय के सभी परिवारों का भौतिक सत्यापन कराने तथा मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग की।
सपा के एक अन्य सांसद बाबू सिंह कुशवाहा ने देश में रसोई गैस सिलेंडर की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में वृद्धि हुई है, जो पिछले 11 महीने में दूसरी बार है। उन्होंने इसे आम आदमी की रसोई पर सीधा प्रभाव डालने वाला बताया। कांग्रेस के किरसन नामदेव ने छत्तीसगढ़ के गढ़चिरौली में निजी उद्योगों के लिए किसानों की उर्वर भूमि के अधिग्रहण का मामला उठाया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि किसानों की उपजाऊ जमीन छीन ली जाएगी, तो उनके पास खेती के लिए कुछ नहीं बचेगा। उन्होंने अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
कांग्रेस की वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने मुंबई में रेल लाइन के किनारे हजारों परिवारों की झुग्गियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 3,150 झोपड़ियों के निवासियों को खाली करने का नोटिस दिया गया है और उन्हें तोड़ने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियों के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है और मुंबई में हजारों लोग रक्षा विभाग और रेलवे की जमीन पर रहते हैं। उन्होंने सरकार से उनके पुनर्वास की मांग की। ये सांसदों की मांगें विभिन्न वर्गों की समस्याओं को उजागर करती हैं।
संसद में कृषि और शहरी विकास से जुड़े मामले
भाजपा के अनूप संजय धोत्रे ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 8,110 रुपये करने की मांग की। उन्होंने कपास उत्पादकों को राहत देने के लिए इस पर आयात कर मौजूदा पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया। भाजपा के भरत सिंह कुशवाहा ने ग्वालियर के कई भागों में कच्चे नाले और अनियोजित सीवेज का मुद्दा उठाते हुए मध्य प्रदेश के इस शहर में सुनियोजित जल निकासी व्यवस्था करने की मांग की।
जनता दल (यूनाइटेड) के कौशलेंद्र कुमार ने बिहार में कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने पर केंद्र से विचार करने और इस संबंध में राज्य सरकार के साथ परामर्श करने का आग्रह किया। उन्होंने अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी माटी कला बोर्ड के गठन के लिए कदम उठाने की मांग की। इन सभी सांसदों की मांगें का उद्देश्य आम आदमी की समस्याओं को संसद के पटल पर लाना था, ताकि उनका उचित समाधान सुनिश्चित हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







