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Indian Census: डेटा सुरक्षा का अभूतपूर्व आश्वासन, जानें 16वीं जनगणना की हर बारीक बात

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Indian Census: समय का पहिया घूमता है और इतिहास खुद को दोहराता है, लेकिन इस बार डिजिटलीकरण की हवा में, भारत अपनी भविष्य की तस्वीर को फिर से गढ़ने को तैयार है।

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Indian Census: डेटा सुरक्षा का अभूतपूर्व आश्वासन, जानें 16वीं जनगणना की हर बारीक बात

Indian Census: भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने हाल ही में देशवासियों से आगामी जनगणना में सही जानकारी देने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि व्यक्तियों द्वारा दी गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग किसी भी साक्ष्य या सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए नहीं किया जाएगा। जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत, एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत सूचनाएं गुप्त रखी जाती हैं, जिससे डेटा के दुरुपयोग की आशंका समाप्त हो जाती है। यह जानकारी दिल्ली सहित देश के कुछ राज्यों में अप्रैल माह में 16वीं जनगणना के पहले चरण की शुरुआत से पहले एक संवाददाता सम्मेलन में दी गई। दिल्ली में जनगणना का कार्य 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगा।

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आयुक्त ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनगणना के दौरान जुटाया गया कोई भी व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहता है। उन्होंने बताया, “इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत साझा नहीं किया जा सकता, न ही अदालत में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही किसी सरकारी या निजी संस्था के साथ साझा किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि केवल सांख्यिकीय डेटा का उपयोग संकलन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जब जाति को जनगणना में शामिल करने और लोगों द्वारा गलत जानकारी दिए जाने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो महापंजीयक ने स्पष्ट किया कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही तय किए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि व्यक्तिगत डेटा की पूर्ण डेटा गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी।

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डिजिटल इंडियन जनगणना: एक नया युग

मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि इस बार पहली बार ‘स्व-गणना’ की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसके तहत, नागरिक जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना) से 15 दिन पहले अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “पहले डेटा कागज़ पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। अब शुरुआत से ही डिजिटल डेटा मिलेगा, जिससे हम बहुत तेज़ी से डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे।” यह सुविधा केवल भारत में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

डेटा सुरक्षा और तकनीकी निगरानी

जनगणना आयुक्त ने आगे बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक समर्पित वेब पोर्टल जनगणना और हाउस लिस्टिंग की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन करेगा। डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए, उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के अद्यतन को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है। यह कदम एक सुरक्षित और पारदर्शी जनगणना प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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