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एग्जिट पोल: एक्सिस माई इंडिया ने पश्चिम बंगाल के आंकड़े जारी करने से क्यों किया इनकार? उठ रहे बड़े सवाल!

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एग्जिट पोल: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर जारी एग्जिट पोल के आंकड़ों पर पहले से ही शक गहराया हुआ था, लेकिन अब एक्सिस माई इंडिया के कर्ताधर्ता प्रदीप गुप्ता के एक फैसले ने इन सवालों को और बढ़ा दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के लिए एग्जिट पोल के आंकड़े जारी न करके खुद अपनी विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं। यह एक ऐसा मामला है जिसने पूरे एग्जिट पोल के सिस्टम पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। बुधवार को पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम दौर का मतदान समाप्त होने के बाद, एक्सिस माई इंडिया सहित कई सर्वे एजेंसियों ने असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के पांचों राज्यों के लिए अपने अनुमान जारी किए थे। हालांकि, एक्सिस माई इंडिया ने तब पश्चिम बंगाल के आंकड़े जारी नहीं किए थे, और टुडेज चाणक्य ने भी अपने आंकड़े गुरुवार को जारी किए।एक नाटकीय प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए प्रदीप गुप्ता ने घोषणा की कि एक्सिस माई इंडिया ने पश्चिम बंगाल के लिए आंकड़े जारी न करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने 80 प्रशिक्षित सर्वेयरों के साथ 16 फील्ड यूनिट्स में बंटकर 8324 किलोमीटर का सफर तय किया और 13,250 लोगों से उनकी राय जानने के लिए संपर्क किया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि लगभग 70 फीसदी लोगों ने सर्वे में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि ऐसे में इन आंकड़ों की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता संदिग्ध होने के कारण पश्चिम बंगाल के आंकड़े जारी नहीं किए गए। यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां एक सर्वे एजेंसी ने खुद अपने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करते हुए कदम पीछे हटा लिए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।इस घटना के बाद अन्य सभी एग्जिट पोल के आंकड़ों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या मतदाताओं के इनकार की यह समस्या केवल प्रदीप गुप्ता की एजेंसी को झेलनी पड़ी होगी? यह सवाल लाजमी है कि अगर एक एजेंसी को इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मना करने का सामना करना पड़ा, तो बाकी तमाम सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों को संदिग्ध क्यों न माना जाए? ऐसा क्यों न माना जाए कि जिस ईमानदारी के साथ प्रदीप गुप्ता ने इस समस्या को स्वीकार किया, दूसरों ने उसे नजरअंदाज कर दिया हो।एग्जिट पोल: एक्सिस माई इंडिया ने पश्चिम बंगाल के आंकड़े जारी करने से क्यों किया इनकार? उठ रहे बड़े सवाल!

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एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर मंडराते बादल

यह याद रखना भी ज़रूरी है कि प्रदीप गुप्ता की एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल 2024 के लोकसभा चुनावों में गलत साबित हुआ था, जिसके बाद वे चैनल पर भावुक हो गए थे। यह संभव है कि प्रदीप गुप्ता उस तरह की छीछालेदर की पुनरावृत्ति से बचना चाह रहे हों, इसीलिए उन्होंने आंकड़े जारी करने से कदम पीछे खींच लिए।गौरतलब है कि ज्यादातर सर्वे पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाते दिखे हैं। वहीं, एक्सिस माई इंडिया समेत सभी एग्जिट पोल असम में हेमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में तीसरी बार भाजपा की सरकार का अनुमान लगा रहे हैं। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की सरकार की संभावना जताई गई है, और तमिलनाडु में डीएमके की वापसी की उम्मीद है, हालांकि कुछ सर्वे ने अभिनेता विजय की पार्टी को अप्रत्याशित उछाल भी दिया है। लेकिन इस पूरे प्रकरण से पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर असमंजस और बढ़ गया है।पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी कई एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। एक दिलचस्प बात यह भी है कि कुछ बड़े न्यूज नेटवर्क के बांग्ला चैनलों पर ममता बनर्जी की शानदार वापसी का अनुमान लगाया गया है, लेकिन यही अनुमान उसी नेटवर्क के राष्ट्रीय हिंदी चैनल पर नहीं दिखाया गया। पश्चिम बंगाल के स्थानीय मीडिया में भी ममता बनर्जी की वापसी के ही ज्यादातर अनुमान हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन सब के बीच, ममता बनर्जी ने सभी एग्जिट पोल से इतर 226 सीटें जीतने का दावा किया है, जिससे पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणाम और भी रोचक हो गए हैं।पांच साल पहले भी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में एक्जिट पोल में इसी तरह का तमाशा हुआ था। न्यूज़ चैनल तब भी बीजेपी की ताजपोशी का ऐलान करते हुए खुशी में पगलाये हुए थे।एग्जिट पोल: एक्सिस माई इंडिया ने पश्चिम बंगाल के आंकड़े जारी करने से क्यों किया इनकार? उठ रहे बड़े सवाल!

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अंतिम फैसला: कौन होगा विजेता?

फिलहाल, सभी की निगाहें चुनाव नतीजों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वोटों की गिनती के बाद कौन सा अनुमान सही साबित होता है और किस पार्टी को जनता का वास्तविक समर्थन मिलता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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