
Teacher Training: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। अब राज्य के साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षकों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण लेना होगा। शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह महत्वपूर्ण योजना बनाई है, जिसका लक्ष्य शिक्षण गुणवत्ता में सुधार करना है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने यह अनिवार्य Teacher Training घोषित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की शिक्षण क्षमता में सुधार करना और उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना है। विभाग का मानना है कि समय-समय पर प्रशिक्षण मिलने से शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके में नयापन आएगा, जिसका सीधा लाभ राज्य के लाखों छात्रों को मिलेगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मई 2026 के पहले सप्ताह से शुरू होगा और इसकी अवधि कुल पांच दिनों की होगी, जो जिला स्तर पर ‘जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान’ (DIET) द्वारा आयोजित की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए एक खास शेड्यूल तैयार किया जाएगा ताकि एक ही स्कूल के सभी शिक्षक एक साथ ट्रेनिंग पर न जाएं।
शिक्षकों के लिए अनिवार्य Teacher Training कार्यक्रम की रूपरेखा
प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए ‘राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद’ (SCERT) को एक नया ‘टीचिंग मॉड्यूल’ तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। यह मॉड्यूल पूरी तरह से क्लासरूम की व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित होगा, ताकि शिक्षकों को मिलने वाली शिक्षण गुणवत्ता वास्तव में कक्षाओं में बच्चों तक पहुंच सके। इसे तैयार करने में डायट के विशेषज्ञों के साथ-साथ ‘सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन’ और ‘लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन’ जैसी बाहरी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। विभाग ने एक हफ्ते के भीतर इस मॉड्यूल को फाइनल करने का लक्ष्य रखा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
चरणबद्ध तरीके से होगा प्रशिक्षण का क्रियान्वयन
यह पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया ‘फेज वाइज’ तरीके से संचालित की जाएगी। पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि शुरुआती स्तर पर बच्चों की नींव मजबूत की जा सके। इसके बाद अगले चरणों में कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रेनिंग सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरी तरह व्यावहारिक बनाया जाएगा ताकि शिक्षक जो सीखें, उसे सीधे कक्षा में बच्चों पर लागू कर सकें और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार ला सकें। यह पहल बिहार के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है, जिससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर ऊंचा उठेगा।
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