
Cooking Coal PDS: ईरान-अमेरिका के बढ़ते तनाव ने दूर बैठे बिहार की रसोई में भी खलबली मचा दी है। रसोई गैस की किल्लत से जूझ रहे आम लोगों को राहत देने के लिए अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जन वितरण प्रणाली की दुकानों से अब लाभार्थियों को सिर्फ राशन ही नहीं, बल्कि खाना बनाने वाला कोयला भी मिलेगा। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
क्या है पूरा मामला? Cooking Coal PDS क्यों बना विकल्प?
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी खान एवं भूतत्व विभाग और परिवहन विभाग के सचिव के साथ सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में एक पत्र जारी किया है। विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक तनाव के कारण ऊर्जा की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) प्रभावित हुई है। इससे राज्य में लोगों के समक्ष रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता की समस्या उत्पन्न हुई है। इस LPG Shortage के निवारण और खाना बनाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में कोयला की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के आलोक में, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से आच्छादित लाभार्थियों को जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों के माध्यम से कुकिंग कोयला की आपूर्ति और वितरण किया जाएगा।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जन वितरण प्रणाली दुकानों के माध्यम से रसोई कार्य के लिए उपयुक्त कोयला की आपूर्ति एवं वितरण की निगरानी जिला और मुख्यालय दोनों स्तर से की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और सुचारु वितरण सुनिश्चित हो सके।
किरोसिन की कमी और बढ़ते कोयले के दाम
एक तरफ जहां Cooking Coal PDS के माध्यम से देने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ जन वितरण प्रणाली की दुकानों में रियायती दर पर किरोसिन मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पत्र जारी हुए 15 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। पटना जिले के डीलरों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से किरोसिन की आपूर्ति नहीं हो रही है। पटना के एडीएम आपूर्ति आरके दिवाकर ने बताया कि पिछली बार जो केरोसिन आया था, वह ठेला वाले व थोक विक्रेताओं को दिया गया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे ही तेल कंपनियां केरोसिन उपलब्ध कराएंगी, उसे पीडीएस दुकानों के माध्यम से आमजन के बीच वितरित कराया जाएगा। आपूर्ति आते ही एक से दो दिन में सभी एसडीओ को इसे आवंटित कर दिया जाएगा, जहां से पीडीएस दुकानों को आवंटन होगा।
शादी-विवाह और बड़े कार्यक्रमों में भोजन के लिए कमर्शियल एलपीजी की सामान्य आपूर्ति न होने के कारण कोयला और लकड़ी की मांग बढ़ गई है। कोयला कारोबारी संजय कुमार के अनुसार, पहले जहां 600 से 650 रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) मिलता था, अब वही कोयला 800 से 900 रुपये में मिल रहा है। दाम बढ़ने का कारण उपलब्धता की कमी और बढ़ती मांग है। प्रशासन का मानना है कि कोयला की आपूर्ति होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की मांग में कमी आएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त रसोई गैस की आपूर्ति संभव हो पाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। ग्रामीण क्षेत्रों में कोयले पर खाना बनाने में विशेष परेशानी नहीं होगी।
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