
Bihar Heatwave: बिहार में गर्मी ने अपने तेवर मई से पहले ही दिखा दिए हैं। अप्रैल के महीने में ही पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जिससे राज्य के अधिकांश शहर लू का प्रकोप झेल रहे हैं। यह असामान्य गर्मी लोगों को परेशान कर रही है और सेहत के लिए चिंता का विषय बन गई है। दो मौसमी परिस्थितियों के कमजोर पड़ने से राज्य में तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है, जिसने आम जनजीवन को प्रभावित किया है।
क्यों बढ़ रहा है बिहार में ‘Bihar Heatwave’ का प्रकोप?
बिहार में समय से पहले पड़ी रही इस भीषण गर्मी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं। पहला, पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर होना, जो पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का सिस्टम बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। इसकी कमजोरी के कारण मैदानी क्षेत्रों में तापमान नियंत्रित नहीं रह पाता। दूसरा, बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमीयुक्त पुरवा हवाओं का कमजोर पड़ना, जिससे बारिश के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ नहीं बन पा रही हैं। इसका सीधा असर यह हुआ कि राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जो आमतौर पर मई के दूसरे सप्ताह से जून के मध्य में दर्ज किया जाता है।
जलवायु और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ 10 से 12 शहरों का अधिकतम पारा 40 से 45 डिग्री के बीच पहुंचना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से एक गंभीर चेतावनी है। अप्रैल-मई में बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवा और शुष्क पछुआ के मेल से दोपहर बाद बारिश का सिस्टम बनता है, लेकिन इस बार पुरवा की पहुंच झारखंड तक ही बेहतर रही है। यह स्थिति पूरे बिहार में ‘Bihar Heatwave’ के गंभीर संकेत दे रही है।
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बक्सर: बिहार का नया हॉटस्पॉट
विशेषज्ञों के अनुसार, भौगोलिक परिस्थितियाँ भी बिहार में बढ़ते तापमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दशकों से गया को बिहार का सबसे गर्म शहर माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अब बक्सर में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। बक्सर, पछुआ हवाओं के प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है, जो उत्तर प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। यह भौगोलिक बदलाव तापमान के वितरण पर सीधा असर डाल रहा है।
शहरीकरण और लू का बढ़ता असर
पटना सहित शहरी क्षेत्रों में इस बढ़ते तापमान का विशेष प्रभाव देखा जा रहा है। दिन के समय पछुआ हवाएँ अपने साथ गर्मी लाती हैं, जिसे शहरों की ऊंची इमारतें अवशोषित कर लेती हैं। शाम के समय जब पुरवा हवाओं का प्रभाव बनता भी है, तो ये इमारतें उनकी नमी को सोख लेती हैं और अपने उष्म प्रभाव को कम करने में सक्षम नहीं हो पातीं। कंक्रीट संरचनाओं की बढ़ती संख्या ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ा रही है, जिससे शहरी इलाकों में गर्मी का असर और अधिक तीव्र हो जाता है।
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गुरुवार को मिली आंशिक राहत, पर गर्मी बरकरार
गुरुवार को हालांकि सूबे में अधिकतम तापमान से थोड़ी आंशिक राहत मिली और कोई भी जिला हीट वेव की चपेट में नहीं रहा। बक्सर, मोतिहारी और शेखपुरा को विशेष राहत मिली, बक्सर में अधिकतम तापमान में 4.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, पटना सहित सात जिले अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर रहे।
- डेहरी: 43 डिग्री सेल्सियस (राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान)
- कैमूर: 42.7 डिग्री सेल्सियस
- गया: 42.2 डिग्री सेल्सियस
- शेखपुरा: 41.6 डिग्री सेल्सियस
- पटना: 41.3 डिग्री सेल्सियस
- सीवान (जिरादेई): 40.9 डिग्री सेल्सियस
- छपरा: 40.8 डिग्री सेल्सियस
हालांकि, गुरुवार को लू का प्रकोप थोड़ा कम हुआ, लेकिन अभी भी कई जिलों में गर्मी का सितम जारी है और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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