
Manhole Cleaning: पटना में मानसून से पहले जलनिकासी की तैयारियों के बीच नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मैनहोल की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें होने के बावजूद आज भी मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारा जा रहा है, जो न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालता है।
मानसून से पहले राजधानी पटना में जलनिकासी और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम मैनहोल की उड़ाही करवा रहा है। वार्ड स्तर पर सफाई कर्मियों से छोटे खुले नाले, बॉक्स नाले, मैनहोल और कैचपिट की सफाई कराई जा रही है। शहर के सभी छह अंचलों में 53 हजार से अधिक मैनहोल में से करीब 38 हजार की सफाई पूरी हो चुकी है। बाकी बचे मैनहोल की सफाई 15 मई तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में, संतोषजनक रिपोर्ट न मिलने पर नगर आयुक्त ने कार्यपालक पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था, जिसके बाद सफाई कार्यों में तेजी आई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मैनहोल सफाई में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
हालांकि, वर्तमान में सफाई में तेजी लाने के बावजूद सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। मार्च महीने में कांग्रेस मैदान के पास वार्ड 43 में एक मजदूर को मैनहोल के भीतर और एक को बाहर देखा गया था। इसी तरह, एएन कॉलेज, मीठापुर और दीघा-गांधी मैदान मेन रोड जैसे कई अन्य स्थानों पर भी मजदूरों को मैनहोल के भीतर उतारकर सफाई कराई जा रही है। यह प्रथा न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि बेहद खतरनाक भी।
सामाजिक न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के बावजूद पटना में Manual Scavenging का दावा कागजी साबित हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा Manual Scavenging पर रोक के बावजूद यह प्रथा जारी है, जिससे कर्मियों को जानलेवा बीमारियों का खतरा रहता है। बिना पीपीई किट के मैनहोल में उतरने से हृदय रोग, त्वचा संक्रमण और सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। पहले भी सीवर लाइन की सफाई के दौरान जहरीली गैसों से कई कर्मियों की मौत हो चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आधुनिक मशीनों के बावजूद Manhole Cleaning में लापरवाही
पटना नगर निगम के पास मैनहोल की सफाई के लिए सुपर सकर और मिनी जेटिंग मशीनें उपलब्ध हैं। इन्हें सभी अंचलों को वितरित किया गया है, ताकि मैनहोल की सफाई में इनका उपयोग किया जा सके। लेकिन, अक्सर पत्थरों, कचरे, जानवर के अवशेष या कपड़ों के कारण मशीनें काम करने में असमर्थ हो जाती हैं। ऐसी जगहों पर आज भी दैनिक मजदूरी पर कर्मियों से सफाई कराई जा रही है। यह स्थिति शहर में Manhole Cleaning की स्थिति पर चिंता जताई है।
मैनुअल स्कैवेंजिंग का कागजी दावा और रोबोट की विफलता
मैनुअल सफाई से मुक्ति दिलाने के लिए बैंडिकूट रोबोट भी मंगवाया गया था। दावा किया गया था कि यह मकड़ीनुमा रोबोट गहरे सीवर के भीतर जाकर कचरा निकालेगा, जिससे इंसानों को अंदर नहीं उतरना पड़ेगा। लेकिन, न तो इस रोबोट का उपयोग हो रहा है और न ही इसकी संख्या बढ़ाई गई है, जिसके कारण मैनुअल सफाई जारी है।
अंचलवार मैनहोल सफाई की स्थिति:
- नूतन राजधानी: कुल 8811 मैनहोल में से 6125 की सफाई हुई।
- बांकीपुर: कुल 11560 मैनहोल में से 6754 की सफाई हुई (करीब 58.4%)।
- अजीमाबाद: कुल 1217 मैनहोल में से 1103 की सफाई हुई।
- पटना सिटी: कुल 357 मैनहोल में से 308 की सफाई हुई।
- कंकड़बाग: कुल 17424 मैनहोल में से 11203 की सफाई हुई (करीब 36% काम बाकी)।
- पाटलिपुत्र: कुल 14237 मैनहोल में से 8258 की सफाई हुई (करीब 58% काम)।
पाटलिपुत्र और बांकीपुर अंचल मैनहोल सफाई में सबसे पीछे हैं, जहाँ लगभग 58-59% काम ही पूरा हो पाया है। जबकि, अजीमाबाद और पटना सिटी में काम अंतिम चरण में है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







