
एम्बुलेंस सेवा: बिहार के जमुई से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय लापरवाही और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। बेहतर इलाज के लिए पटना भेजे जा रहे एक मरीज की बीच रास्ते में मौत हो गई, क्योंकि जिस एम्बुलेंस में उसे ले जाया जा रहा था, उसका पेट्रोल ही खत्म हो गया। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जमुई सदर अस्पताल से जुड़े इस मामले में धीरज रविदास की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। पहले उन्हें झाझा में प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर जमुई लाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उनके सिर में ब्लड क्लॉट (रक्त का थक्का) जमा होने की बात कही और तुरंत उन्हें पटना रेफर कर दिया।
परिजनों ने 102 एम्बुलेंस से मरीज को लेकर पटना के लिए प्रस्थान किया। दोपहर का समय था और तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच बताया गया। करीब 25 से 30 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद एम्बुलेंस सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मातासी के पास अचानक रुक गई। वजह थी एम्बुलेंस का पेट्रोल खत्म हो जाना।
बीच रास्ते में एम्बुलेंस सेवा बनी काल
पेट्रोल खत्म होते ही एम्बुलेंस सड़क किनारे खड़ी रह गई और गाड़ी के अंदर की सभी सुविधाएं बंद हो गईं। ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और अन्य चिकित्सा उपकरण काम करना बंद कर गए, यहां तक कि एयर कंडीशनर भी बंद हो गया। भीषण गर्मी में मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों के मुताबिक, मरीज तड़पता रहा और मौके पर कोई दूसरी व्यवस्था तुरंत नहीं हो सकी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
परिवार का गंभीर आरोप: ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’
मृतक के बेटे अजीत रविदास ने बताया कि एम्बुलेंस चालक केवल 100 रुपये का पेट्रोल लेकर निकला था, जिसके कारण बीच रास्ते में यह भयावह स्थिति उत्पन्न हुई। करीब दोपहर 1:40 बजे, सुनसान इलाके में एम्बुलेंस खड़ी रही। इस दौरान न तो मरीज को इलाज मिल सका और न ही समय पर दूसरी गाड़ी पहुंच पाई। हालत लगातार खराब होती गई और आखिरकार मरीज ने दम तोड़ दिया। अजीत ने एम्बुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी और चालक पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर समय पर उचित सुविधा मिलती तो उनके पिता की जान बच सकती थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट
मरीज की मौत के बाद, दूसरी 102 एम्बुलेंस से शव और परिजनों को वापस सदर अस्पताल लाया गया। परिजनों ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासन से करने की बात कही है। सिविल सर्जन, एसपी और डीएम को लिखित आवेदन देने की तैयारी चल रही है, साथ ही एफआईआर दर्ज कराने की भी मांग की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस घटना के बाद इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। यह घटना एक बार फिर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों और लापरवाही को उजागर करती है, जहां मामूली चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।







