
भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा: बिहार और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ रही घुसपैठ और तस्करी ने केंद्र सरकार की नींद उड़ा दी है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत सीमावर्ती इलाकों में अत्याधुनिक निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाएगी। इस योजना से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
हाईटेक वॉच टावरों से होगी निगरानी
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान के तहत, सीमांचल के अररिया और किशनगंज जिलों के 34 सीमावर्ती गांवों में अत्याधुनिक वॉच टावर बनाए जाएंगे। ये टावर केवल निगरानी के लिए ऊंचे ढांचे भर नहीं होंगे, बल्कि इनमें सायरन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाना है।
अधिकारियों के अनुसार, किशनगंज जिले के चार प्रखंडों के 22 गांवों और अररिया जिले के तीन प्रखंडों के 12 गांवों को इस योजना के लिए चुना गया है। इन गांवों में बनने वाले वॉच टावर सुरक्षा बलों को दूर से ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि को भांपने में मदद करेंगे। किसी भी आपात स्थिति में, टावर पर लगे सायरन से पूरे गांव को तुरंत अलर्ट किया जा सकेगा, जिससे घुसपैठियों या तस्करों को पकड़ना आसान होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
ड्रोन से निगरानी और सीमा स्तंभों का पुनर्निर्माण
सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सीमा पर पिलर के सर्वे और मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है। सीमांचल से कोसी तक फैली 231 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई पिलर या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह गायब हो गए हैं। प्रशासन अब इन पिलर के स्थान पर नए सीमा स्तंभ स्थापित करने का काम युद्ध स्तर पर कर रहा है। प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार के अनुसार, सीमा प्रबंधन के साथ-साथ इन इलाकों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ और सुरक्षा का संगम
यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस योजना के तहत केवल सुरक्षा ढांचे ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए भी विशेष अनुदान दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने मई के पहले सप्ताह में दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है, जिससे पहले पटना से लेकर किशनगंज तक के अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इंडो-नेपाल बॉर्डर का यह हिस्सा तस्करी और घुसपैठ के लिए काफी संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहां भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा मजबूत करना बेहद ज़रूरी है।
वॉच टावरों और अन्य सुरक्षा उपायों से इस संवेदनशील क्षेत्र में कानून व्यवस्था और सीमा पर सुरक्षा दोनों ही मजबूत होंगी, जिससे आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी।
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