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Bhagalpur News: भागलपुर सामाजिक सुधार: नशामुक्ति और दहेज प्रथा उन्मूलन पर धर्मगुरुओं की बड़ी पहल

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भागलपुर सामाजिक सुधार: भागलपुर में एक बड़ी पहल देखने को मिली है। समाज में व्याप्त नशाखोरी और दहेज जैसी घातक बुराइयों को खत्म करने और शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए शहर के प्रमुख धार्मिक नेताओं ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में इन गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा हुई और उनके समाधान के लिए ठोस रणनीति बनाई गई, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है।

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भागलपुर बेटरमेंट फाउंडेशन (तंजीम-ए-इमाम-ए-मसाजिद) के तत्वावधान में शाह मंज़िल, खानकाह पीर दमड़िया शाह में इमाम-ए-मसाजिद, उलेमा-ए-किराम, सामाजिक सुधारकों और मस्जिदों के ज़िम्मेदारों की एक महत्वपूर्ण एवं उद्देश्यपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता खानकाह के सज्जादा नशीन हज़रत मौलाना सैयद शाह फख़्र-ए-आलम हसन नदवी ने की।

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सत्रह सूत्रीय एजेंडे पर गंभीर चर्चा

अपने अध्यक्षीय संबोधन में हज़रत मौलाना ने फाउंडेशन के सत्रह सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उसके गंभीरता से क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सामाजिक सुधार के लिए यह एजेंडा अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यदि इसे ईमानदारी व निष्ठा के साथ लागू किया जाए तो इसके सकारात्मक प्रभाव पूरे देश में महसूस किए जा सकते हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य भागलपुर सामाजिक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाना था। उन्होंने धर्म, बिरादरी और मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता की सेवा के भाव से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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नशाखोरी और दहेज जैसी बुराइयों पर भागलपुर सामाजिक सुधार की अहम बैठक

बैठक में नशाखोरी, दहेज जैसी घातक सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन और शिक्षा से वंचित (ड्रॉपआउट) बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने जैसे अहम मुद्दों पर विशेष ध्यान आकर्षित किया गया। इस अवसर पर मुफ्ती मोहम्मद अफ़ान अब्बासी ने इस सुधारात्मक प्रयास को अनुकरणीय बताते हुए धार्मिक नेता के रूप में अपने विचार साझा किए और सत्रह सूत्रीय एजेंडे के प्रभावी क्रियान्वयन के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने फाउंडेशन द्वारा आयोजित पिछली बैठक की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की और उसके दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डाला। डॉ. हबीब मुर्शिद ख़ान ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस पहल को सराहनीय एवं महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इस प्रकार के प्रयासों को सफल बनाने के लिए हम सभी को पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहना चाहिए तथा यथासंभव इस मिशन में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

मौलाना असजद नाज़री ने भी अपने विचार रखते हुए कहा, “आज समाज को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक हो गया है, और यदि यह दिशा मस्जिद से मिले तो उसका प्रभाव और भी अधिक होता है।” इसी प्रकार अन्य धार्मिक नेता, इमामों और मस्जिदों के ज़िम्मेदारों ने भी अपने विचार रखे और इस सुधारात्मक अभियान को समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

आध्यात्मिक माहौल और भविष्य की योजना

बैठक के समापन पर नमाज़-ए-मगरिब के तुरंत बाद मजलिस-ए-ज़िक्र का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण, विनम्रता और एकाग्रता के साथ अल्लाह के ज़िक्र में भाग लिया। इस आध्यात्मिक सभा ने उपस्थित लोगों के हृदय को आलोकित किया और आत्म-सुधार की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि वे इस सुधारात्मक मिशन को अपने-अपने क्षेत्रों में फैलाएंगे और समाज की बेहतरी के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह बैठक न केवल वैचारिक और सुधारात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिद्ध हुई, बल्कि इसने व्यावहारिक कदमों के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान किया, जिसे सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभावों वाली एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

बैठक में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में सैयद शाह अली सज्जाद साहब, सैयद अहमद साहब, मौलाना सैयद शाह हुज़ैफ़ा, मुफ्ती सैयद शाह सलमान साहब, मौलाना ज़ाहिद हलीमी, मौलाना ऐनुल हक़ साहब, मुफ्ती सैफुल्लाह साहब, मौलाना असजद नाज़री, तस्नीम कौसर, जनाब आरिफ़ीन, मौलाना मासूम रज़ा अशरफ़ी साहब सहित अन्य लोग शामिल थे। वक्फ़ 159 के अंतर्गत स्थापित “इंसानी मदद केंद्र” के निदेशक प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी भी बैठक में उपस्थित रहे और अपने विचार व्यक्त किए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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