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सीवान स्वच्छता: करोड़ों खर्च के बावजूद शहर में गंदगी का अंबार, जिम्मेदार कौन?

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सीवान स्वच्छता: सीवान में क्या हाल है भइया! शहर के कोने-कोने में कूड़े का ढेर लगा है, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऐसा लग रहा है मानो नगर परिषद को लोगों की सेहत से कोई सरोकार नहीं।

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बिहार के सीवान शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। नगर परिषद क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में पिछले लगभग एक सप्ताह से कूड़ा नहीं उठाया गया है, जिसके कारण सड़कों और गलियों में कचरे का अंबार लग गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस गंभीर समस्या से शहरवासी दुर्गंध, गंदगी और संक्रमण फैलने के डर से जूझ रहे हैं। यह गंभीर स्थिति सीवान स्वच्छता अभियान पर सवाल खड़े करती है।

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सीवान स्वच्छता की बदहाली: प्रमुख स्थानों पर भी गंदगी

शहर के प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक स्थलों के आसपास भी गंदगी का साम्राज्य है। गांधी मैदान स्थित प्रसिद्ध बुढ़िया माई देवी मंदिर परिसर और गांधी मैदान के चारों तरफ कचरा पसरा हुआ है। वहीं, सदर अस्पताल से गांधी मैदान जाने वाले मुख्य मार्ग पर पत्रकार भवन के सामने और चिराई घर के पास कई हफ्तों से मुख्य सड़क पर कूड़े का ढेर लगा है। व्यस्त सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी कचरा नहीं उठाया जाना सीवान नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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करोड़ों का खर्च, फिर भी सफाई व्यवस्था बदहाल

जानकारी के अनुसार, पहले नगर परिषद क्षेत्र की सफाई व्यवस्था एक एजेंसी और नगर परिषद की संयुक्त जिम्मेदारी थी। तब 30 वार्डों की सफाई लगभग 49 लाख रुपये प्रतिमाह की लागत से एजेंसी द्वारा की जाती थी, जबकि 15 वार्डों की सफाई नगर परिषद स्वयं कराता था। उस समय एजेंसी सफाईकर्मी, उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में तीन निजी एजेंसियों को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उपकरण और सामग्री की व्यवस्था नगर परिषद को करनी है। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था में प्रतिमाह दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है, इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था पहले से अधिक खराब हो गई है।

गंदगी से कई इलाकों में नाले जाम पड़े हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। आम लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि शहर की यह स्थिति है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर विकास एवं आवास विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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