
बिहार कैबिनेट: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। कुढ़नी से भाजपा विधायक केदार प्रसाद गुप्ता को सम्राट चौधरी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है। जमीनी नेता के तौर पर पहचान रखने वाले गुप्ता की यह वापसी भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
भाजपा ने बिहार में संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधने की अपनी कोशिशों को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक केदार प्रसाद गुप्ता को दूसरी बार मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। उनके बिहार कैबिनेट में शामिल होने के बाद मुजफ्फरपुर में खुशी का माहौल है। इससे पहले भी वे नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि भाजपा को उन पर कितना भरोसा है।
केदार प्रसाद गुप्ता का राजनीतिक सफर
भाजपा में केदार प्रसाद गुप्ता को एक जमीनी और संघर्षशील नेता के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा पंचायत स्तर से शुरू की थी, जहां वे लंबे समय तक मुखिया रहे और करीब 15 वर्षों तक ग्रामीण राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2015 में वे पहली बार कुढ़नी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। हालांकि, 2020 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2022 के उपचुनाव में शानदार वापसी कर उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत और जन आधार का प्रदर्शन किया। मार्च 2024 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी मिली थी, जहां उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
भाजपा का सियासी दांव: ओबीसी-वैश्य चेहरे को मिली अहमियत
केदार प्रसाद गुप्ता कानू (हलवाई) समाज से आते हैं, जिसकी ग्रामीण इलाकों और पिछड़े वर्गों में अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है। भाजपा उन्हें ओबीसी और वैश्य वोट बैंक के एक मजबूत चेहरे के रूप में लगातार आगे बढ़ा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार कैबिनेट में उनकी यह वापसी भाजपा के सामाजिक समीकरणों को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। आगामी चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका बेहद अहम रहने वाली है, क्योंकि वे भाजपा को इन वर्गों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
जमीनी नेता की पकड़ और चुनावी गणित
गुप्ता की नियुक्ति से मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के कई जिलों में भाजपा की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। उनकी जमीनी पकड़ और सामाजिक समीकरणों को साधने की क्षमता भाजपा के लिए चुनाव में बड़ा फायदा दे सकती है। यह नियुक्ति न सिर्फ वैश्य समाज को साधने का एक प्रयास है, बल्कि पिछड़े वर्गों के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। भाजपा की इस रणनीति से विपक्ष के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
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