
मुजफ्फरपुर बाल गृह पलायन: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित नरौली वृहद आश्रय गृह (बालक) से 10 बच्चों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रशासन को सकते में डाल दिया है। यह सिर्फ बच्चों के भागने का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में हुई बड़ी चूक का जीता-जागता सबूत है। 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी 7 बच्चे अभी तक लापता हैं, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
नरौली आश्रय गृह से बच्चों का फरार होना: अब तक क्या हुआ?
मुजफ्फरपुर बाल गृह पलायन मामले में अब तक की जानकारी के अनुसार, नरौली वृहद आश्रय गृह से कुल 10 बच्चे फरार हुए थे। इनमें से तीन बच्चों को तो बरामद कर लिया गया है, लेकिन बाकी सात बच्चे अब भी लापता हैं। घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक टीम को कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। आसपास के इलाकों में गहन तलाशी अभियान जारी है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं, लेकिन बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा।
मजबूत सुरक्षा घेरे के बावजूद कैसे भागे बच्चे?
नरौली वृहद आश्रय स्थल की सुरक्षा व्यवस्था देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। ऊंची चारदीवारी, उस पर लगे मजबूत जाल, भारी लोहे के गेट और कैंपस के भीतर भी चौकस सुरक्षा का दावा किया जाता है। ऐसे में बच्चों का इतनी आसानी से फरार हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस बिल्डिंग में बच्चे रहते थे, वहीं वार्डन और सुपरिटेंडेंट की भी ड्यूटी थी। यह घटना सुरक्षा में सेंध का स्पष्ट संकेत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि घटना के समय ड्यूटी पर तैनात कुछ होमगार्ड जवान सो रहे थे। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले 6 होमगार्ड जवानों को हटा दिया है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल गार्डों पर कार्रवाई से पूरी जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी? बाल संरक्षण के ऐसे मामलों में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
सुपरिटेंडेंट और अन्य अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल बाल गृह के सुपरिटेंडेंट और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक सिर्फ गार्डों की लापरवाही का परिणाम नहीं हो सकती। ऐसे में बाल गृह प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुजफ्फरपुर बाल गृह पलायन मामले की जांच के लिए डीएम ने एक कमेटी गठित की है, जो सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की भूमिका और बच्चों के फरार होने की परिस्थितियों की जांच करेगी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
नरौली बाल गृह से बच्चों के फरार होने की इस घटना ने एक बार फिर बिहार के बाल संरक्षण गृहों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी राज्य में कई बाल गृहों से जुड़ी लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ रोकी जा सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







