
Tamil Nadu की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री विजय के निजी ज्योतिषी रिकी रतन पंडित वेत्रिवेल को राजनीतिक सलाहकार बनाया गया। हालांकि, इस फैसले पर तीखे विरोध के बाद राज्य सरकार को अपनी ही नियुक्ति रद्द करनी पड़ी। क्या था पूरा मामला और क्यों मचा बवाल, आइए जानते हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय द्वारा हाल ही में रिकी रतन पंडित वेत्रिवेल को अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक गलियारों में जमकर हंगामा हुआ। बताया जा रहा है कि रिकी रतन पंडित मुख्यमंत्री विजय के निजी ज्योतिषी भी हैं। उन्हें तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) ने पहले पार्टी प्रवक्ता नियुक्त किया था, और मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने उन्हें अपने राजनीतिक प्रभाग में विशेष अधिकारी बना दिया।
मुख्यमंत्री विजय के सलाहकार: क्यों हुआ इतना विरोध?
इस नियुक्ति का कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) सहित कई दलों ने कड़ा विरोध किया। ये सभी दल तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) सरकार को समर्थन दे रहे हैं। विरोध का मुख्य कारण एक सरकारी पद पर ज्योतिषी की नियुक्ति को बताया जा रहा था। आज विधानसभा में हुए विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भी डीएमडीके, वीसीके, कम्युनिस्ट दलों, मानवतावादी जनता पार्टी और मानवतावादी लोकतांत्रिक पार्टी समेत कई दलों ने इस मुद्दे को उठाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
विधायक ने सीधे पूछा सवाल, सरकार ने झुकाया सिर
डीएमडीके विधायक प्रेमलता विजयकांत ने इस मामले पर तीखी आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री विजय से सीधे सवाल किया कि उनके ज्योतिषी को सरकारी पद क्यों दिया गया। इस बढ़ते दबाव और चौतरफा विरोध के चलते तमिलनाडु सरकार ने आखिरकार घोषणा की कि मुख्यमंत्री विजय के सलाहकार के रूप में रिकी रतन पंडित की नियुक्ति वापस ली जा रही है। उधर, रिकी रतन पंडित की नियुक्ति के खिलाफ तिरुवल्लूर जिले के कीलानूर की अधिवक्ता आर. रति ने मुख्यमंत्री विजय और तमिलनाडु सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को कानूनी नोटिस भी भेजा था। यह ज्योतिषी की नियुक्ति का मामला सरकार के लिए बड़ी फजीहत का कारण बन गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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