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Bihar News: बिहार में CD Ratio ने रचा इतिहास: 60% पार कर दी आर्थिक तरक्की की नई उड़ान!

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CD Ratio: सुनिए भाई साहब! बिहार ने अपनी आर्थिक चाल में ऐसी तेज़ी पकड़ी है कि अब बड़े-बड़े राज्यों को भी पसीना आ जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 60% के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। यह सीधे-सीधे बिहार की बढ़ती अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली में जनता के बढ़ते भरोसे का सबूत है। पटना में 18 मई को आयोजित राज्य स्तरीय बैंकिंग समीक्षा बैठक में यह अहम खुलासा हुआ। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के अनुसार, 60.21 प्रतिशत का यह ऐतिहासिक आंकड़ा राज्य की तेज होती अर्थव्यवस्था का प्रमाण है। राज्य सरकार और बैंकों के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो पाया है। इस उपलब्धि के पीछे कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में कर्ज के बढ़ते प्रवाह की सबसे बड़ी भूमिका रही है।

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आर्थिक उछाल का संकेत: 60% पार CD Ratio

यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बिहार का CD रेश्यो मात्र 44.09 प्रतिशत था। अब यह लंबी छलांग लगाकर 60.21 प्रतिशत पर पहुंच गया है। राज्य में स्थित बैंक शाखाओं में कुल जमा राशि अब बढ़कर 6,15,428 करोड़ रुपये हो गई है। इसके समानांतर, कुल ऋण वितरण का आंकड़ा भी 3,70,563 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में जमा राशि में 51,983 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। वहीं ऋण वितरण में 37,882 करोड़ रुपये का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि राज्य में निवेश और स्वरोजगार की गतिविधियों ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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किसानों को राहत: सहयोग शिविर और डिजिटल क्रांति

राज्य सरकार का मुख्य फोकस कृषि और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर है। विकास आयुक्त ने बैंकों को सख्त निर्देश दिया है कि वे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना को और अधिक सरल बनाएं। किसानों को सही समय पर कर्ज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनता और किसानों की सहूलियत के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 19 मई से ‘सहयोग शिविर’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। ये शिविर हर 15 दिन में नियमित रूप से लगाए जाएंगे। इनमें केसीसी आवेदन, नवीनीकरण और बैंकिंग से जुड़ी अन्य समस्याओं का त्वरित निपटारा किया जाएगा। इसके अलावा, एक बड़ा तकनीकी कदम उठाते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना को ‘जन समर्थ’ पोर्टल के साथ जोड़ा जा रहा है। इस डिजिटल पहल से किसानों को पूरी पारदर्शिता के साथ तुरंत ऋण मिल सकेगा।

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राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि 18 मई को बिहार विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय बैंकिंग समीक्षा बैठक में घोषित की गई। सिंह ने इस उपलब्धि को आर्थिक विकास और बैंकिंग विश्वास का एक महत्वपूर्ण संकेतक बताया। उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार, बैंकों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो में वृद्धि: आर्थिक विकास का नया अध्याय

बैठक के दौरान, अधिकारियों ने बैंकिंग प्रदर्शन, ऋण वितरण और कृषि व सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह की समीक्षा की। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार की बैंक शाखाओं में कुल जमा 6,15,428 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि कुल ऋण वितरण 3,70,563 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बैंक जमा में 51,983 करोड़ रुपये और ऋण वितरण में 37,882 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। अधिकारियों ने यह भी बताया कि बिहार का क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो 2018-19 में 44.09% से बढ़कर 2025-26 में 60.21% हो गया है। सिंह ने बताया कि कृषि, MSMEs, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्टार्टअप्स और ग्रामीण विकास में बढ़े हुए ऋण प्रवाह ने राज्य में आर्थिक गतिविधियों को फिर से जीवंत करने में योगदान दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह उपलब्धि राज्य के समग्र वित्तीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

कृषि और केसीसी योजना पर विशेष ध्यान

विकास आयुक्त ने बैंकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के कार्यान्वयन को मजबूत करने और किसानों तक समय पर ऋण वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बैंकों को केसीसी नवीनीकरण और वितरण की प्रक्रिया को सरल और तेज करने का भी निर्देश दिया। सिंह ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 19 मई से ‘सहयोग शिविर’ शुरू करेंगे, ताकि बैंकिंग सेवाओं से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों, जिनमें केसीसी आवेदन, नवीनीकरण और अन्य ऋण-संबंधी मुद्दे शामिल हैं, का समाधान किया जा सके। ये शिविर हर 15 दिन पर आयोजित होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बैठक में यह भी बताया कि किसानों के लिए तेज और अधिक पारदर्शी डिजिटल ऋण पहुंच की सुविधा के लिए केसीसी योजना को ‘जन समर्थ’ पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा।

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  • बिहार राज्य सहकारी बैंक – 168.78%
  • बंधन बैंक – 153.32%
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र – 145.72%
  • एचडीएफसी बैंक – 95.87%
  • कोटक महिंद्रा बैंक – 95.57%
  • आईसीआईसीआई बैंक – 82.37%
  • एक्सिस बैंक – 77.16%
  • बिहार ग्रामीण बैंक – 64.95%
  • पंजाब एंड सिंध बैंक – 64.26%
  • जम्मू एंड कश्मीर बैंक – 63.11%
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कम क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो वाले बैंकों पर चिंता

बैठक में कई प्रमुख बैंकों द्वारा दर्ज किए गए अपेक्षाकृत कम क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो पर भी चिंता व्यक्त की गई। इनमें शामिल थे:

  • इंडियन ओवरसीज बैंक – 42.20%
  • आईडीबीआई बैंक – 43.47%
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया – 43.63%
  • बैंक ऑफ इंडिया – 43.73%
  • पंजाब नेशनल बैंक – 44.57%
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सिंह ने इन बैंकों को बिहार में कृषि, MSMEs और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य आर्थिक गतिविधियों को और मजबूत करना और समाज के सभी वर्गों तक बैंकिंग पहुंच का विस्तार करना है। बैठक में विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

बैंकों का प्रदर्शन: कौन चमका, कौन पिछड़ा?

बैंकिंग समीक्षा बैठक में सभी बैंकों के प्रदर्शन को विस्तार से परखा गया। कुछ बैंकों ने शानदार काम किया है, जबकि कुछ बड़े सरकारी बैंकों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विकास आयुक्त ने स्पष्ट किया कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। नीचे उन प्रमुख बैंकों का प्रदर्शन दिया गया है, जिनका CD Ratio राज्य के औसत से काफी नीचे है और जिन्हें सुधार की आवश्यकता है। साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों की सूची भी यहाँ है:

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले बैंक (वित्तीय वर्ष 2025-26):

स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक: 168.78%

बंधन बैंक: 153.32%

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 145.72%

एचडीएफसी बैंक: 95.87%

कोटक महिंद्रा बैंक: 95.57%

आईसीआईसीआई बैंक: 82.37%

एक्सिस बैंक: 77.16%

बिहार ग्रामीण बैंक: 64.95%

पंजाब एंड सिंध बैंक: 64.26%

जम्मू एंड कश्मीर बैंक: 63.11%

कम प्रदर्शन करने वाले बैंक (वित्तीय वर्ष 2025-26):

इंडियन ओवरसीज बैंक: 42.20%

आईडीबीआई बैंक: 43.47%

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 43.63%

बैंक ऑफ इंडिया: 43.73%

पंजाब नेशनल बैंक: 44.57%

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