
Malmas Mela: राजगीर का एक महीना लंबा मलमास मेला शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार मेले में रौनक कुछ कम दिख रही है। दूर-दराज से पहुंचे व्यापारियों और होटल संचालकों के चेहरे पर मायूसी छाई है, क्योंकि शुरुआती दिनों में जैसी भीड़ की उम्मीद थी, वह अभी तक नदारद है।
राजगीर में एक माह तक चलने वाले Malmas Mela के चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन दुकानदारों, झूला संचालकों, सर्कस कर्मियों और होटल व्यवसायियों के चेहरे पर अब भी मायूसी छाई है। सभी को उम्मीद थी कि शुरुआती दिनों से ही बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालु पहुंचेंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा माहौल नहीं बन पाया है। स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण होटल व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Malmas Mela में बाहरी श्रद्धालुओं की कमी के कारण
इस बार मेले में स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या अधिक है। अधिकतर लोग बाइक, स्कूटी या निजी वाहनों से आकर देर रात तक मेला घूमकर लौट जाते हैं, जिससे होटलों के कमरे खाली पड़े हैं। राजगीर के कई लग्जरी और मध्यम श्रेणी के होटलों को उम्मीद के मुताबिक बुकिंग नहीं मिल रही है। स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि भीषण गर्मी बाहरी श्रद्धालुओं के कम आगमन की एक बड़ी वजह है। उनका अनुमान है कि तापमान में कमी आने और मेले की रौनक बढ़ने के साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आ सकती है।
Malmas Mela में महंगे किराये पर अस्थायी दुकान लगाने वाले बाहरी कारोबारियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। आधुनिक खिलौने, रेडीमेड कपड़े, बच्चों के रंग-बिरंगे परिधान और मेहंदी जैसी पारंपरिक वस्तुएं श्रद्धालुओं को अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। कई दुकानदार दिनभर ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मनोरंजन के साधन, फिर भी खाली सीटें
शाम ढलते ही राजगीर मेला स्थल सर्कस, थिएटर, मौत का कुआं और झूलों की चमकदार सजावट से जगमगा उठता है। रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक उद्घोषणाओं से पूरा मेला क्षेत्र गुलजार हो जाता है। इस बार सर्कस, थिएटर और विभिन्न प्रकार के झूले सहित मनोरंजन के लगभग सभी प्रमुख साधन पहुंचे हैं। हालांकि, मेले के चार दिन बीतने के बाद भी अधिकांश आयोजकों की सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं। शाम बढ़ने के साथ टिकट दरों में कमी की जा रही है, लेकिन अधिकतर श्रद्धालु इनका आनंद बाहर से ही लेना पसंद कर रहे हैं। इंडिया थिएटर, शोभा सम्राट थिएटर और पायल एक नजर थिएटर में 300 से 1200 रुपये तक के टिकट हैं। अजूबा अजंता सर्कस और अन्य सर्कसों के टिकट 100 से 300 रुपये के बीच हैं। जादूगर और जलपरी शो का टिकट 100 रुपये, जबकि मौत का कुआं 50 से 100 रुपये तक है। छोटे झूलों का किराया 50 से 80 रुपये और बड़े रोमांचक झूले, जैसे ब्रेक डांस और जायंट व्हील, 100 से 250 रुपये प्रति सवारी हैं।
प्रशासन की मुस्तैदी और आगे की उम्मीदें
जिला प्रशासन ने इस बार सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क टेंट सिटी बनाई गई है, जिसकी व्यवस्था महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी पसंद आ रही है। पिछले Malmas Mela की तुलना में इस बार प्रशासन ने यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। अब तक जाम की कोई बड़ी समस्या देखने को नहीं मिली है। पैदल, वाहन और घुड़सवार सुरक्षा बल पूरी रात गश्त कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं का सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों को अब भी उम्मीद है कि जैसे-जैसे मेले के दिन आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी और राजगीर मेला में रौनक के साथ कारोबार में भी तेजी आएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ठंडे पेय और फास्ट फूड की बंपर बिक्री
भयंकर गर्मी के कारण मेले में सबसे अधिक बिक्री बोतलबंद पानी, नींबू पानी, शिकंजी और अन्य ठंडे पेय पदार्थों की हो रही है। विभिन्न कंपनियों की आइसक्रीम और जूस भी बच्चों, महिलाओं और युवाओं को खूब लुभा रहे हैं। फास्ट फूड, नमकीन और हल्के नाश्ते की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखी जा रही है। महंगाई की मार बड़े होटलों और रेस्टोरेंट की भोजन थालियों पर साफ दिख रही है, जिन्हें श्रद्धालु खास पसंद नहीं कर रहे हैं। हालांकि, विभिन्न संस्थाओं द्वारा संचालित शुद्ध शाकाहारी और सस्ते अस्थायी भोजनालयों में कुछ लोग भोजन करते दिख रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों को अब भी उम्मीद है कि जैसे-जैसे मेले के दिन आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी और कारोबार में तेजी आएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
शाम ढलते ही गुलजार होता है मेला क्षेत्र
शाम ढलते ही राजगीर मलमास मेला स्थल पर सर्कस, थिएटर, मौत का कुआं और झूलों की चमकदार सजावट लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है। रंग-बिरंगी रोशनी, मनमोहक गीत-संगीत और आकर्षक उद्घोषणाओं से पूरा मेला क्षेत्र गुलजार हो उठता है। इस बार मनोरंजन के सभी प्रमुख साधन मौजूद हैं, लेकिन मेले के चार दिन बीतने के बाद भी अधिकांश आयोजकों की सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं। शाम बढ़ने के साथ टिकट दरों में भी कमी की जा रही है, फिर भी अधिकतर श्रद्धालु इनका आनंद बाहर से ही लेना पसंद कर रहे हैं।
आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ मेले की रौनक भी बढ़ेगी। जिला प्रशासन ने सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क टेंट सिटी बनाई गई है, जिसकी व्यवस्था महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी पसंद आ रही है। पिछले Malmas Mela की तुलना में इस बार यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे अब तक जाम की बड़ी समस्या देखने को नहीं मिली है। पैदल, वाहन और घुड़सवार सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं का सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।






