
Chemists Strike: बिहार के बेनीपुर में बुधवार को ऐसा नज़ारा दिखा कि मरीजों की सांसें अटक गईं। 24 घंटे के बंद के आह्वान पर दवा की सभी दुकानें बंद रहीं, जिसके चलते आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टर की पर्ची लेकर भटकते रहे लोग, लेकिन दवा नहीं मिली।
पूरे अनुमंडल क्षेत्र में थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखीं। बिहार राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर यह फैसला लिया गया था। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में यह बंदी की गई, जिसका असर साफ दिखा। क्षेत्र के निजी चिकित्सकों के पास से इलाज कराकर निकले मरीज अपनी पर्चियां लेकर इधर-उधर भटकते रहे, पर उन्हें कहीं दवा उपलब्ध नहीं हो पाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्यों हुई दवा दुकानदारों की हड़ताल?
दरभंगा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव शंभू प्रसाद सिंह ने बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री की मनमानी आपूर्ति के खिलाफ यह सामूहिक निर्णय लिया गया था। ऑनलाइन कंपनियां दवाओं पर भारी छूट देती हैं, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों के रोजगार पर व्यापक असर पड़ रहा है। उनका जीवन-यापन मुश्किल हो गया है। इसलिए सरकार से मांग है कि दवा को ऑनलाइन बिक्री से बाहर रखा जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पहले भी कर चुके हैं विरोध प्रदर्शन
बंद से पहले सोमवार और मंगलवार को भी दवा दुकानदारों ने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने काला फीता लगाकर अपनी मांगों की ओर ध्यान खींचा था। बुधवार को 24 घंटे के बंद का बेनीपुर के बाजार में शत-प्रतिशत असर देखने को मिला, जिससे दवा दुकानदारों की हड़ताल पूरी तरह सफल रही।
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