
पुल में भ्रष्टाचार: बिहार के अररिया जिले से आई एक खबर आपको झकझोर देगी। परमान नदी पर 7.32 करोड़ की लागत से बना झमटा-महिषाकोल पुल महज तीन साल में ही जर्जर होकर धंस गया है। 206 मीटर लंबा झमटा-महिषाकोल अररिया का पुल है, जिसका निर्माण मई 2022 में पूरा हुआ था। पुल का पाया नीचे धंसने से इसकी मुख्य रेलिंग में भयावह दरारें आ चुकी हैं, बावजूद इसके इस पर से वाहनों का आवागमन धड़ल्ले से जारी है, जो किसी बड़े हादसे को खुला आमंत्रण दे रहा है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
निर्माण के वक्त ही उठाई गई थी आवाज, जिसे किया गया नजरअंदाज
इस पुल की बदहाली की कहानी इसके निर्माण काल से ही शुरू हो गई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने पुल निर्माण में इस्तेमाल हो रही घटिया सामग्री और अनियमितताओं को लेकर एकजुट होकर काम रुकवा दिया था। यहीं नहीं, स्थानीय जिला पार्षद सबा फैसल ने भी कई बार संबंधित ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी थीं, लेकिन इन सभी चेतावनियों को दरकिनार कर आनन-फानन में पुल का निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण ने पुल में भ्रष्टाचार के आरोपों को बल दिया है, जिसकी वजह से करोड़ों की लागत से बना पुल इतनी जल्दी जर्जर हो गया।
अररिया: जर्जर पुलों का लंबा इतिहास
अररिया जिला में यह कोई पहली घटना नहीं है जब ग्रामीण कार्य प्रमंडल (RWD) द्वारा निर्मित कोई पुल भ्रष्टाचार या तकनीकी विफलता के कारण जर्जर हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में अररिया में पुल निर्माण की गुणवत्ताहीन कार्य का एक लंबा इतिहास रहा है। यह घटनाएं दिखाती हैं कि अररिया का पुल निर्माण गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती है:
- पड़रिया घाट पुल (कुर्साकांटा-सिकटी, बकरा नदी): 18 जून 2024 को उद्घाटन से पहले ही ढह गया। लागत ₹12 करोड़, लंबाई 182 मीटर।
- कोआखाढ़ पुल (फारबिसगंज): वर्ष 2019 में बनकर तैयार हुआ, नवंबर 2023 में पिलर धंस गया।
- गोपालपुर-अम्हरा मार्ग पुल (फारबिसगंज प्रखंड): पूर्व में ही धंस चुका है, गुणवत्ताहीन कार्य इसका मुख्य कारण था।
- झमटा-महिषाकोल पुल (परमान नदी): मई 2022 में पूर्ण हुआ, मई 2026 में इसका मुख्य पाया धंस गया और रेलिंग दरक गई।
हाईलेवल जांच टीम गठित, संवेदक को नोटिस जारी
पुल के पाया धंसने की खबर सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर कुमार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच दल ने मौके का निरीक्षण किया और अररिया जिला पदाधिकारी (DM) को रिपोर्ट सौंपी। जिला पार्षद सबा फैसल और फैसल जावेद यासीन ने भी डीएम से मिलकर उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और दोषी इंजीनियरों व संवेदक पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जांच अधिकारियों ने बताया कि इस पुल का निर्माण राजगीर स्थित ‘प्रकाश कंस्ट्रक्शन’ ने किया था। यह पुल अभी दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period – DLP) के अंतर्गत आता है, जिसमें 5 साल तक टूट-फूट की मरम्मत की जिम्मेदारी संवेदक की होती है। कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रकाश कंस्ट्रक्शन को नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि तय समय में पुल का पुनर्निर्माण और पाया दुरुस्त नहीं किया गया, तो विभाग संवेदक की सिक्योरिटी मनी जब्त कर उसे ब्लैकलिस्ट करेगा और कानूनी कार्रवाई करेगा। इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए पुल में भ्रष्टाचार के दोषियों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






