
Bhagalpur Ganga Incident: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई चलती नाव से अचानक गंगा में कूद जाए? भागलपुर में ठीक ऐसा ही हुआ था, जहां 20 मई को एक युवक ने नदी में छलांग लगा दी थी। अब शनिवार सुबह, 6 दिन बाद उसका शव बरामद कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
भागलपुर के बरारी पुल घाट पर 20 मई को चलती नाव से गंगा नदी में कूदे एक युवक का शव आखिरकार शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। इस Bhagalpur Ganga Incident ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। शव को सबसे पहले ‘एंबुलेंस नाव’ के नाविक लाल बहादुर मंडल ने देखा और तत्काल नियंत्रण कक्ष में मौजूद आपदा मित्र अमित कुमार को सूचना दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Bhagalpur Ganga Incident: 6 दिन बाद कैसे मिला शव?
सूचना मिलते ही आपदा मित्रों ने बिना देरी किए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। एंबुलेंस नाव से मौके पर पहुंचे आपदा मित्र अमित कुमार ने सूझबूझ दिखाते हुए शव को रस्सी से बांधा और इसकी जानकारी एसडीआरएफ टीम को दी। इसके बाद आपदा मित्रों ने मिलकर गंगा नदी से रस्सी के सहारे शव को किनारे तक पहुंचाया। बाद में, एसडीआरएफ टीम और बरारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा: आत्महत्या थी वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक ने 20 मई को चलती नाव से गंगा में छलांग लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। घटना के दिन एसडीआरएफ टीम ने कई घंटों तक गहन खोजबीन की थी, लेकिन शव का कोई पता नहीं चल पाया था। शनिवार सुबह शव पानी की सतह पर आ गया। युवक ने लोअर और शर्ट पहन रखी थी, और शव पूरी तरह फूल चुका था। मौत के इस रहस्य को सुलझाने के लिए पुलिस जांच में जुट गई है। इस दुखद घटना ने क्षेत्र में गम का माहौल पैदा कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
यात्रियों का सहारा बनी नाव, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जानकारी के मुताबिक, Vikramshila Setu पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद नवगछिया आने-जाने के लिए नाव ही लोगों का एकमात्र मुख्य सहारा बनी हुई है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री नाव के जरिए गंगा पार करते हैं। यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए घाट पर दर्जनों आपदा मित्र, एसडीआरएफ की टीम और जिला प्रशासन के कर्मी लगातार तैनात रहते हैं। इसी वजह से युवक का शव इतनी जल्दी नाविक की नजर में आ सका। यह घटना एक बार फिर Vikramshila Setu की मरम्मत और आवागमन के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल देती है।
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