Baboo Bhola Lal Das: दरभंगा के गौड़ाबौराम प्रखंड स्थित कसरौर गांव में मिथिला के गौरव, साहित्यकार और ‘दधीचि’ के नाम से विख्यात बाबू भोला लाल दास की स्मृति में एक गरिमापूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान न केवल उनके अतुलनीय योगदान को याद किया गया, बल्कि गांव के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को संकलित करने के लिए ‘कसरौर दर्पण’ नामक पुस्तिका प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण संकल्प भी लिया गया।
बाबू भोला लाल दास: एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व
कसरौर मध्य विद्यालय प्रांगण में आयोजित इस संगोष्ठी का संयोजन समाजसेवी बाबू भोला लाल दास मंच के संयोजक वीरेंद्र कुमार ने किया। इसमें समाज, साहित्य और जनसरोकार से जुड़े अनेक बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि समाजसेवी सुश्री रेखा झा, सरपंच शंकर झा, क्रीड़ा भारती उत्तर बिहार के प्रांत उपाध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह और राजकीय मध्य विद्यालय कसरौर के प्रधानाचार्य मनोज झा उपस्थित थे।
मंच संचालन कर रहे रामनाथ झा ने कहा कि ‘मिथिला के दधीचि’ बाबू भोला लाल दास युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका व्यक्तित्व केवल साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक चेतना, जनजागरण और मातृभाषा के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण भी था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रविंद्र सिंह ने युवाओं से समाज के उत्थान, सकारात्मक परिवर्तन और जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।संयोजक वीरेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में बाबू भोला लाल दास के जीवन और सामाजिक व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मिथिला की आत्मा और सामाजिक चेतना के जीवंत प्रतीक थे। उनका जन्म 28 मई 1894 को दरभंगा जिला के वर्तमान गौड़ाबौराम प्रखंड अंतर्गत ज्वालामुखी भगवती निवास स्थान नाम से विख्यात कसरौर ग्राम में हुआ था। उन्होंने अपने लेखन, संगठन क्षमता और मातृभाषा मैथिली के प्रति समर्पण के माध्यम से मिथिला समाज को नई दिशा दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। साहित्य सृजन के साथ-साथ समाज निर्माण की उनकी सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
साहित्यिक कृतियाँ और ‘कसरौर दर्पण’ प्रकाशन का संकल्प
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि भोला बाबू के अथक प्रयास और संगठनात्मक क्षमता के कारण वे मैथिली जगत में अत्यंत सम्मानित रहे। वे कवि, निबंधकार, नाटककार, संपादक और मैथिली आंदोलन के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनके योगदान ने मैथिली साहित्य को समृद्ध किया। इस तरह के कार्यक्रम मैथिली साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्न प्रकार हैं:
- मैथिली व्याकरण चन्द्रोदय
- सुगम व्याकरण
- सरल व्याकरण
- मिथिला संघ भारती
- मैथिली रामायण
- जनकी रामायण
ये कृतियाँ आज भी समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गौरव और आत्मसम्मान का विषय है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि अगला वर्ष केवल स्मरण का नहीं बल्कि दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण का वर्ष होगा। गांव की कला, संस्कृति, इतिहास तथा समाज के उन महान व्यक्तित्वों को, जिन्होंने सामाजिक जनसरोकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया, उन्हें संकलित कर ‘कसरौर दर्पण’ नामक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने का संकल्प लिया गया है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए गांव की धरोहर और प्रेरणा का दस्तावेज बनेगा। बाबू भोला लाल दास का यह साहित्यिक और सामाजिक योगदान अविस्मरणीय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंसभा के दौरान उपस्थित लोगों ने इस पहल का जोरदार स्वागत किया और इसे गांव के सांस्कृतिक इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में नटवर झा, शिवम झा, शंभू दास, शेखर झा, त्रिपुरारी झा, अनिल झा, नवल झा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, बुद्धिजीवी एवं विद्वतजन उपस्थित थे।







