Nepal Hindu Rashtra News: नेपाल में ‘हिंदू राष्ट्र’ के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। बेनी जिले की गलेश्वर नगर पालिका में हुए इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी बात रखी। इस संगोष्ठी में जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के शिष्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए चल रहे अभियान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसने सबका ध्यान खींचा।
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गलेश्वर नगर पालिका भवन में आयोजित इस संगोष्ठी में सनातन धर्म से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें नगर पालिका के सचिव, कर्मचारी, उद्योग वाणिज्य महासंघ बेनी के पदाधिकारी, सदस्य, स्वामी ऋषि प्रपन्ना आचार्य जी महाराज, विश्व हिंदू सम्मेलन के उपाध्यक्ष श्री शंकर खराल जी और गलेश्वर मंदिर के पुजारी तिवारी जी शामिल थे। सभी ने मिलकर इस महत्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श किया।

Nepal Hindu Rashtra News: आखिर क्यों उठी हिंदू राष्ट्र की मांग?
जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य श्री प्रेमचंद्र झा जी ने गोवर्धन मठ पुरी से सनातन मानबिंदुओं की रक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक समय में पूरा विश्व सनातनी था, लेकिन आज हिंदुओं के लिए विश्व में एक भी राष्ट्र नहीं है। यह स्थिति वास्तव में चौंकाने वाली है।
प्रेमचंद्र झा जी ने सभी से जल्द से जल्द नेपाल और भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करवाने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने का आह्वान किया। उनका यह बड़ा फैसला और अपील कई लोगों को प्रभावित कर गया। इस संगोष्ठी में मौजूद सभी वक्ताओं ने जगद्गुरु शंकराचार्य जी के अभियान में भरपूर सहयोग देने का आश्वासन दिया।
‘हम नेपाल भव्य बनाएंगे, हिंदू राष्ट्र बनाएंगे’ – इस संकल्प का अर्थ क्या है?
कार्यक्रम का समापन ‘हम नेपाल भव्य बनाएंगे, हिंदू राष्ट्र बनाएंगे’ के जयघोष के साथ हुआ। यह नारा केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि एक हड़कंप पैदा करने वाला संकल्प है, जो नेपाल में सनातन संस्कृति और पहचान को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी पहल को दर्शाता है। इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग तेजी से जोर पकड़ रही है।
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इस संगोष्ठी ने जहां एक ओर धार्मिक और सामाजिक चर्चाओं को बढ़ावा दिया है, वहीं दूसरी ओर इसने नेपाल की राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले समय में देखना होगा कि इस अभियान का क्या असर होता है और क्या नेपाल ‘हिंदू राष्ट्र’ के रूप में अपनी पहचान वापस पाता है।








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