Bihar Fiscal Report: पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में राज्य के खजाने की स्थिति थोड़ी उलझन भरी रही। सरकार को बजट अनुमान से अधिक राजस्व तो मिला, लेकिन खर्चों को पूरा करने के लिए दोगुना कर्ज लेना पड़ा। सब्सिडी पर भी उम्मीद से कहीं ज्यादा राशि खर्च हुई, जिससे राजकोषीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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Bihar Fiscal Report: राजकोषीय संतुलन की बढ़ी चुनौती
बिहार में राजकोषीय संतुलन बनाए रखना पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में एक बड़ी चुनौती बन गया है। वित्त विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार को बजट अनुमान से 1142 करोड़ रुपये अधिक की प्राप्ति हुई। हालांकि, इस बढ़ी हुई आय के बावजूद, राज्य को अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए दोगुना कर्ज लेना पड़ा है। यह स्थिति राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि अधिक आय के बावजूद कर्ज में वृद्धि चिंता का विषय है।
आय बढ़ी, फिर भी क्यों लेना पड़ा दोगुना कर्ज?
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य के खजाने में कुल 295217.15 करोड़ रुपये आए। यह बजट में अनुमानित राशि से लगभग 1142 करोड़ रुपये अधिक है। यह दर्शाता है कि राजस्व संग्रह में सरकार सफल रही, लेकिन बावजूद इसके कर्ज का बोझ दोगुना बढ़ गया। इसका मुख्य कारण सब्सिडी पर होने वाला भारी खर्च है। सब्सिडी में 21846.44 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो बजट प्रस्ताव से लगभग डेढ़ गुना अधिक है।
यह अतिरिक्त खर्च सरकार के राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकता है, जिसके दहाई अंक में पहुंचने का अनुमान है। सरकार को आय के साधनों को और मजबूत करने तथा खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था स्थिर रह सके।
सब्सिडी पर बेतहाशा खर्च और आगे की राह
सब्सिडी पर बेतहाशा खर्च ने बिहार के वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव डाला है। डेढ़ गुना अधिक सब्सिडी खर्च, यानी लगभग 21846.44 करोड़ रुपये, सीधे तौर पर राजकोषीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। वित्त विभाग फिलहाल बही-खाते को अंतिम रूप दे रहा है। अगर विभागों के स्तर पर कुछ बचे-बढ़े ब्योरा होंगे, तो उसे समायोजित कर संशोधित हिसाब-किताब भी जारी हो सकता है। यह स्थिति सरकार के लिए एक चेतावनी है कि उसे अपनी खर्च प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी होगी और सब्सिडी जैसे मदों पर विवेकपूर्ण ढंग से खर्च करना होगा ताकि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
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यह वित्तीय रिपोर्ट राज्य के आर्थिक प्रबंधन की चुनौतियों को रेखांकित करती है। सरकार को अब भविष्य की वित्तीय नीतियों पर गंभीरता से विचार करना होगा ताकि राज्य पर बढ़ते कर्ज का बोझ कम किया जा सके और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।







