Darbhanga Makhana News: मिथिलांचल का गौरव और किसानों की आय का प्रमुख स्रोत, मखाना अब वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान बनाने को तैयार है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के विशेषज्ञों ने दरभंगा का दौरा कर मखाने को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का बड़ा भरोसा दिया है। इस पहल से बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल पाएगा।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्या है वैश्विक विशेषज्ञों के दौरे का मकसद?
अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के दक्षिण एशिया प्रमुख डॉ. अंजनी कुमार और प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री डॉ. धीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया। इस महत्वपूर्ण भ्रमण का उद्देश्य दरभंगा में मखाना उत्पादन, प्रोसेसिंग और प्राकृतिक खेती में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों का जमीनी स्तर पर जायजा लेना था। विशेषज्ञों ने बिहार के मखाने को वैश्विक बाजार से सीधे जोड़ने का बड़ा भरोसा दिलाया है।
जाले कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचने पर केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. दिव्यांशु शेखर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें KVK परिसर में चल रहे विभिन्न उन्नत कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी डेमोस्ट्रेशन की तकनीकी जानकारी दी। वैश्विक टीम ने मुख्य रूप से इन उन्नत तकनीकों का बारीकी से अवलोकन किया:
- मखाना उत्पादन की दोहरी तकनीक: परंपरागत ‘तालाब विधि’ के साथ-साथ पानी की बचत करने वाली आधुनिक ‘खेत विधि’ से मखाना की उन्नत खेती।
- सिंघाड़े की नई किस्में: बाजार में भारी मांग वाले कांटारहित हरे एवं लाल सिंघाड़े की वैज्ञानिक खेती।
- प्राकृतिक व एकीकृत कृषि: रासायनिक खाद मुक्त ‘प्राकृतिक खेती इकाई’, वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) यूनिट, हरी खाद के रूप में मूंग व ढैंचा का चक्र, और मेड़ पर मक्का उत्पादन का अनोखा मॉडल।
- नीली और श्वेत क्रांति: एक साथ मछली एवं बत्तख पालन (एकीकृत मत्स्य पालन) तथा उद्यान पौधशाला (नर्सरी) और पॉलीहाउस में संरक्षित खेती।
Darbhanga Makhana News: मखाना किसानों की चुनौतियाँ और वैश्विक समाधान
केवीके का अवलोकन करने के बाद आईएफपीआरआई (IFPRI) का यह उच्चस्तरीय दल जाले के मशहूर प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र कुमार के मखाना खेतों में सीधे जमीन पर उतरा। विशेषज्ञों ने जलभराव वाले खेतों में जाकर मखाना उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक और जमीनी समस्याओं को समझा।
इस दौरान मखाना की खेती में लगने वाली लागत, स्थानीय स्तर पर कुशल मजदूरों की कमी, मौसम चक्र में बदलाव के कारण फसलों को होने वाले नुकसान और जल प्रबंधन जैसी मुख्य चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई।डॉ. अंजनी कुमार ने आश्वस्त किया कि इन जमीनी इनपुट्स को वैश्विक स्तर पर नीतिगत (पॉलिसी मेकिंग) चर्चाओं में शामिल किया जाएगा ताकि भविष्य में किसानों को बेहतर सरकारी व संस्थागत सहयोग मिल सके।
बिचौलियों से मुक्ति, सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच
दौरे के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने दरभंगा के एक अन्य सफल और प्रगतिशील किसान अनिल कुमार की अत्याधुनिक ‘मखाना प्रसंस्करण एवं बीज प्रसंस्करण इकाई’ (प्रोसेसिंग प्लांट) का दौरा किया। विशेषज्ञों ने वहां कच्चे मखाने (गुरी) की छंटाई, भुनाई, लावा फोड़ने (पॉपिंग) और ग्रेडिंग से लेकर पैकेजिंग की पूरी स्वचालित और अर्ध-स्वचालित व्यवस्था का सघन जायजा लिया।निरीक्षण के बाद वैश्विक विशेषज्ञों ने मखाना के उत्पादन, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन), बेहतर ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय निर्यात (एक्सपोर्ट) की असीम संभावनाओं पर स्थानीय अधिकारियों संग गोलमेज चर्चा की। आईएफपीआरआई के दक्षिण एशिया प्रमुख ने चंपारण और मिथिला के किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि दरभंगा सहित पूरे बिहार के मखाना उत्पादक किसानों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बनाने, बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराने और मखाना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए संस्थान तकनीकी व नीतिगत स्तर पर हरसंभव वैश्विक सहयोग प्रदान करेगा।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंआप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।इस ऐतिहासिक दौरे के समय कृषि विज्ञान केंद्र के कई वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मी, प्रगतिशील किसान और कृषि विभाग के स्थानीय पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट।








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