Darbhanga Consumer Court News: दरभंगा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने चिकित्सा सेवा में बड़ी त्रुटि और लापरवाही के लिए एक निजी अस्पताल को दोषी ठहराया है। आयोग ने पारस ग्लोबल अस्पताल, अल्लपट्टी, लहेरियासराय, दरभंगा को 33 लाख 20 हजार रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला उपभोक्ता वाद संख्या डीसी 195/सीसी/34/2023 में सुनाया गया, जिसमें अस्पताल की सेवा में कमी और लापरवाही के कारण एक मरीज की असमय मौत हो गई थी।
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क्या था पूरा मामला?
आयोग के अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित और सदस्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले में अस्पताल को दोषी पाया। मृतक वरुण कुमार झा, जिनकी आयु मात्र 47 वर्ष थी, की मौत चिकित्सा लापरवाही के कारण हुई थी। आयोग ने मुआवजे के रूप में 28 लाख 80 हजार रुपये असमय मौत के लिए, 2 लाख 40 हजार रुपये भविष्य के नुकसान के लिए, 1 लाख 10 हजार रुपये चिकित्सा खर्च के मद में, 25 हजार रुपये संपत्ति के नुकसान के लिए, 40 हजार रुपये दांपत्य क्षति के लिए, 15 हजार रुपये दाह संस्कार के मद में और 10 हजार रुपये वाद खर्च के लिए निर्धारित किए हैं। कुल मिलाकर यह राशि 33 लाख 20 हजार रुपये होती है, जिसे अस्पताल को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो विपक्षी निदेशक, पारस ग्लोबल अस्पताल को ब्याज सहित राशि का भुगतान करना होगा।
लापरवाही और टालमटोल का आरोप
यह घटना 6 जनवरी 2023 की है, जब वरुण कुमार झा को रात 10 बजे तबीयत बिगड़ने के कारण पारस ग्लोबल अस्पताल, अल्लपट्टी में भर्ती कराया गया था। 7 जनवरी 2023 को मरीज की जांच के बाद, अस्पताल प्रबंधन ने उसे खतरे से बाहर बताया था। हालांकि, उसी रात मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई और रात 12 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जब मृत्यु का कारण और किए गए इलाज के बारे में पूछा, तो अस्पताल प्रबंधन ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और उन्हें 1 लाख 10 हजार 309 रुपये का बिल थमा दिया।
परिजनों द्वारा बार-बार इलाज का चार्ट मांगने के बावजूद, अस्पताल प्रबंधन ने उसे उपलब्ध नहीं कराया। इस घटना से व्यथित होकर, खराजपुर निवासी अधिवक्ता कृष्ण कुमार मिश्रा, उनकी पुत्री और मृतक की पत्नी कल्पना झा ने अपने अवयस्क बच्चों मयंक कश्यप और मानव रंजन की ओर से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दरभंगा में पारस संस्थान के खिलाफ उपभोक्ता वाद संख्या डीसी 195/सीसी/34/23 दायर किया। इसी मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद आयोग ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
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पीड़ित परिवार को मिला न्याय
उपभोक्ता के अधिवक्ता मुरारी लाल केवट ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया है। यह फैसला उन सभी मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बड़ी राहत है, जो चिकित्सा लापरवाही का शिकार होते हैं। यह निर्णय अस्पतालों को अपनी सेवाओं में अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता बरतने के लिए प्रेरित करेगा। यह मामला देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है कि कैसे आम नागरिक भी अपने अधिकारों के लिए लड़कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के मामलों में उपभोक्ता आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर जब बात जीवन और मृत्यु की हो।







