Bhagalpur Crime News: बिहार के भागलपुर जिले में एक हृदय रोग विशेषज्ञ के छह वर्षीय बेटे को गलत नीयत से अगवा करने की कोशिश की गई। यह घटना तिलकामांझी थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध सैंडिस कंपाउंड में मंगलवार सुबह उस समय हुई, जब बच्चा अपने परिवार के साथ टहलने निकला था। बच्चे की चीख-पुकार और परिजनों की तत्काल सतर्कता के कारण एक बड़ा अनर्थ होते-होते बचा। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया, लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्यवाही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
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सैंडिस कंपाउंड में अपहरण का प्रयास: क्या थी पूरी घटना?
हृदय रोग विशेषज्ञ अपने पिता और छह वर्षीय बेटे के साथ रोजाना की तरह सुबह सैंडिस कंपाउंड पहुंचे थे। उन्होंने अपने पिता और बच्चे को परिसर के पास उतारा और अपनी कार पार्क करने चले गए। कुछ देर बाद जब डॉक्टर वापस लौटे तो उन्हें अपना बेटा वहां नहीं मिला। बच्चे को आसपास काफी तलाशने के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो पिता घबरा गए। उन्होंने तत्काल अपने परिवार और परिचितों को घटना की सूचना देनी शुरू कर दी। इसी बीच, डॉक्टर को अपने बेटे के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, जो कंपाउंड के पिछले हिस्से से आ रही थी।
आवाज की दिशा में जाने पर डॉक्टर ने देखा कि एक व्यक्ति उनके बेटे के साथ मारपीट कर रहा था और उसे अगवा करने की कोशिश कर रहा था। डॉक्टर ने जैसे ही इसका विरोध किया, आरोपी उनसे भी उलझ गया और उन पर हमला करने लगा। इस बीच, डॉक्टर के बुलावे पर पहुंचे अन्य लोगों में से किसी ने तिलकामांझी थाना पुलिस को सूचित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर थाने ले गई। इस घटना के बाद सैंडिस कंपाउंड में मौजूद लोगों के बीच काफी अफरातफरी मच गई और बच्चे के परिजन काफी समय तक सदमे में रहे।
हिरासत के बाद भी FIR में देरी: पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
पीड़ित चिकित्सक ने तिलकामांझी थाने में इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पकड़ा गया व्यक्ति शराब के नशे में धुत था। डॉक्टर ने बताया कि आरोपी के मुंह से शराब की तेज गंध आ रही थी और उन्होंने इस बात की जानकारी पुलिस को भी दी। डॉक्टर ने पूरे मामले को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के लिए आवेदन दिया। हालांकि, इसके बाद थाने में कई घंटों तक ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ चलता रहा। पीड़ित चिकित्सक ने आरोप लगाया कि आवेदन देने के बावजूद तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उन्हें बताया गया कि मामले की जांच सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी करेंगे।
इस बीच, दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें भी लगातार चलती रहीं। डॉक्टर का दावा है कि आरोपी पक्ष के कई लोग भी थाने पहुंच गए थे और उन्हें यह भी बताया गया कि आरोपी की ओर से भी मामला दर्ज कराया जा सकता है। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने का प्रयास किया जा रहा था। आरोपी की पहचान प्रेम शंकर प्रसाद उर्फ मिंटो के रूप में हुई है, जो पुलिस की विशेष शाखा में तैनात रह चुका है। इस वजह से मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं। डॉक्टर ने यह भी आरोप लगाया कि थाने में मौजूद रहने के दौरान भी आरोपी लगातार उन्हें धमकी देता रहा। उन्होंने दावा किया कि नशे की हालत में होने के बावजूद आरोपी को उत्पाद विभाग की ओर से क्लीन चिट दे दी गई थी। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Sandis Compound News पर लोगों की नजर बनी हुई है।
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एसएसपी का आश्वासन और आगे की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी को इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। तिलकामांझी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने मीडिया को बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी होते ही प्राथमिकी दर्ज कर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले अपराधों पर चिंता बढ़ाती है, जिससे समाज में डर का माहौल पैदा हो रहा है।







