IAS Senthil Kumar: बिहार के एक बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. सेंथिल कुमार को बड़ी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत ने उन्हें और तीन अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे ट्रायल को समाप्त करता है।
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अदालत ने इस मामले पर अंतिम मुहर लगाते हुए पटना के तत्कालीन नगर आयुक्त के. सेंथिल कुमार समेत कुल चार लोगों को धनशोधन निवारण अधिनियम के सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। कोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है, जिससे सभी आरोपियों ने चैन की सांस ली है।
सबूतों के अभाव में बरी हुए अधिकारी
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और निगरानी विभाग भ्रष्टाचार के इस चर्चित मामले में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट के समक्ष कोई भी ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह से असफल रहे। बुधवार को पीएमएलए की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें और लंबी बहस सुनी। यह सुनवाई कई घंटों तक चली, जिसमें हर पहलू पर विचार किया गया।
इसके बाद जज ने साक्ष्यों के अभाव में केस को आगे खींचने का कोई ठोस आधार नहीं पाया। अदालत ने पाया कि जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ और गवाह पर्याप्त नहीं थे। इस महत्वपूर्ण निर्णय में, आईएएस अफसर के. सेंथिल कुमार के अलावा उनके सगे भाई के. अय्यप्पन, नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त वैद्यनाथ दास और ठेकेदार विमल कुमार को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया गया।
IAS Senthil Kumar: पटना हाईकोर्ट के फैसले ने दी कानूनी राह
आपको बता दें कि इस कानूनी राहत की बुनियाद पटना हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से जुड़ी हुई है। दरअसल, पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अंशुल ने बीते 6 अप्रैल को धनशोधन के इस कथित अपराध पर पीएमएलए की विशेष अदालत द्वारा 15 सितंबर 2022 को लिए गए कॉग्निजेंस को पूरी तरह से रद्द कर दिया था। इस फैसले ने इस देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिहार मनी लॉन्ड्रिंग केस को एक नई दिशा दी।
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हाईकोर्ट के इसी आदेश को कानूनी आधार मानते हुए पटना सिविल कोर्ट की विशेष अदालत ने अब चारों आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे की फाइल को पूरी तरह बंद कर दिया है। गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले को सही मानते हुए शुरुआत में पीएमएलए की विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की थी। चार्जशीट के बाद ही के. सेंथिल कुमार समेत चारों आरोपियों पर कानूनी संज्ञान लिया गया था और उन पर मुकदमा शुरू हुआ था।
जांच एजेंसियों की कमजोर पैरवी
हालांकि, अंततः जांच एजेंसियों की तरफ से मजबूत पैरवी और पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने इस पूरे ट्रायल पर विराम लगा दिया। यह फैसला उन मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां जांच एजेंसियां ठोस सबूत पेश करने में विफल रहती हैं। इस मामले में सबूतों का अभाव ही आरोपियों की रिहाई का मुख्य कारण बना। इस फैसले से न्यायपालिका पर आम लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।







