Jale Nal-Jal Yojana News: बिहार के जाले प्रखंड अंतर्गत गररी पंचायत के कमलपुर गांव से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। रविवार को नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी पर काम करते समय एक मजदूर अचानक नीचे गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, अक्सर अपने क्रियान्वयन में चुनौतियों का सामना करती है। इसी कड़ी में, जाले प्रखंड के गररी पंचायत स्थित कमलपुर गांव में रविवार को इस योजना के तहत चल रहे पानी टंकी निर्माण कार्य के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। कार्यस्थल पर सेंटेक्स चढ़ाने का काम चल रहा था, तभी एक मजदूर संतुलन खोकर नीचे गिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूर टंकी से नीचे उतरने की कोशिश कर रहा था, जब टंकी की कमजोर छज्जी टूट गई और वह सीधे जमीन पर आ गिरा। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। कटरा क्षेत्र के निवासी अभिषेक कुमार नामक यह मजदूर इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके शरीर का एक बड़ा हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।घायल अभिषेक को आनन-फानन में जाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी प्रारंभिक जांच की। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए, डॉक्टरों ने तत्काल उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) रेफर कर दिया। इस बीच, टंकी पर फंसे एक अन्य मजदूर को ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ और रस्सी की मदद से सुरक्षित नीचे उतार लिया, जिससे एक और संभावित दुर्घटना टल गई।
जाले नल-जल योजना: निर्माण कार्य में सुरक्षा की अनदेखी
इस दर्दनाक हादसे के बाद, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नल-जल योजना के ठेकेदार और कार्य एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण जैसे हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और मजबूत सीढ़ियां उपलब्ध नहीं थीं। यह सीधे तौर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, जिसकी वजह से एक मजदूर को इतनी गंभीर चोटें आईं।यह घटना एक बार फिर देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Bihar Labor Safety के नियमों के प्रति बरती जा रही लापरवाही को उजागर करती है। बिहार में अक्सर देखा जाता है कि सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती। ठेकेदार लागत कम करने के चक्कर में सुरक्षा उपकरणों से समझौता करते हैं, जिससे मजदूरों का जीवन हमेशा खतरे में रहता है। यह प्रवृत्ति न केवल अमानवीय है, बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
कमलपुर गांव में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोग प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। यह आवश्यक है कि मजदूरों को सुरक्षित वातावरण में काम करने का अधिकार मिले।बिहार सरकार को अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर और अधिक गंभीर होना होगा। इस घटना से सबक लेते हुए, सभी निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किए जाने चाहिए और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। घायल मजदूर को उचित मुआवजा और सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।यह दुखद घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उन सभी मजदूरों की आवाज है, जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर विकास कार्यों को अंजाम देते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज और सरकार दोनों का सामूहिक कर्तव्य है।








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