Bihar Police Bharti News: बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है, जो अभ्यर्थियों को लाखों रुपये लेकर परीक्षा में पास कराता था। इस मामले में पुलिस ने मुंगेर और अरवल जिलों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह गिरफ्तारी केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसंधान के दौरान हुई है, जिसने राज्य भर में सनसनी मचा दी है।
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सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का खेल कैसे चलता था?
पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि परीक्षा माफिया बेहद शातिर तरीके से मेधावी छात्रों को ‘स्कॉलर’ के रूप में इस्तेमाल करते थे। इन स्कॉलरों को मूल अभ्यर्थियों की जगह लिखित परीक्षा में बैठाया जाता था, जिसके एवज में उन्हें प्रत्येक परीक्षा के लिए एक से दो लाख रुपये तक का भुगतान किया जाता था। माफिया गिरोह मूल उम्मीदवारों के प्रवेश पत्र पर उनकी तस्वीर बदलकर स्कॉलर की फोटो लगा देते थे, जिससे ये फर्जी परीक्षार्थी आसानी से परीक्षा केंद्र में प्रवेश पा लेते थे और किसी को शक भी नहीं होता था।
इस पूरे सुनियोजित गोरखधंधे को अंजाम देने में बायोमेट्रिक जांच करने वाले कर्मियों की भी सक्रिय मिलीभगत पाई गई है। यह उनके सहयोग के बिना संभव नहीं था कि फर्जी परीक्षार्थी बायोमेट्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर पाते। फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के फोटो, हस्ताक्षर, पैराग्राफ राइटिंग और बायोमेट्रिक मिलान में गंभीर विसंगतियां सामने आने लगीं। इन गड़बड़ियों ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया।
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह अभ्यर्थियों से तीन से पांच लाख रुपये की मोटी रकम लेकर सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा पास कराने का ठेका लेता था। दलाल अभ्यर्थियों को सीधे इन परीक्षा माफियाओं से जोड़ते थे। माफिया गिरोह पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा करते थे कि वे आठ लाख रुपये में पूरी भर्ती प्रक्रिया, यानी लिखित और शारीरिक दोनों परीक्षाएं, पार करा देंगे।
इस प्रक्रिया में अभ्यर्थियों से उनके सभी शैक्षणिक दस्तावेज पहले ही ले लिए जाते थे। इसके बाद स्कॉलर के माध्यम से लिखित परीक्षा दिलाई जाती थी और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में भी पूरी तरह से ‘सेटिंग’ की जाती थी, जिससे कोई भी संदिग्ध गतिविधि पकड़ में न आ सके। यह बड़ा खुलासा बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और ईमानदार अभ्यर्थियों के मनोबल को तोड़ने वाला है।
सिपाही भर्ती घोटाले में अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में, शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान कुल 563 अभ्यर्थियों की पहचान की गई थी, जिनके संबंध में अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। इन्हीं अनियमितताओं के आधार पर सात अप्रैल 2025 को सचिवालय थाना में एक विस्तृत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। केंद्रीय चयन पर्षद की प्राथमिकी शाखा की प्रभारी एसआई अमृता प्रियदर्शनी ने धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और बिहार लोक परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत यह मामला दर्ज कराया था।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने अनुसंधान के दौरान त्वरित कार्रवाई करते हुए अरवल के कुर्था और मुंगेर के तारापुर समेत राज्य के विभिन्न स्थानों पर सघन छापेमारी की। इस छापेमारी अभियान में रंजय कुमार, मिथुन कुमार, बलराम कुमार, सुभाष कुमार पासवान, रामजीवन कुमार, राजा बाबू, गोपाल कुमार साह, मृत्युंजय दास और सुधीर कुमार सहित कुल 10 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। Munger Crime News में यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।
सचिवालय डीएसपी-1 अनु कुमारी ने मीडिया को इस मामले की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस घोटाले में कुल 563 अभ्यर्थियों और कई स्कॉलरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब तक की कार्रवाई में कुल 88 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। डीएसपी कुमारी ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच अभी भी जारी है और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों, चाहे वे गिरोह के सदस्य हों या सरकारी कर्मी, की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
इस बड़े घोटाले की जांच का दायरा अब राज्य के कई जिलों तक फैल गया है। भागलपुर, मुंगेर, गया, लखीसराय, बांका, बेगूसराय, मधुबनी, जमुई, सिवान, मधेपुरा, समस्तीपुर, अरवल, रोहतास, नालंदा और वैशाली सहित बिहार के विभिन्न हिस्सों के अभ्यर्थी और संदिग्ध इस जांच के घेरे में हैं। यह दर्शाता है कि यह फर्जीवाड़ा केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि राज्यभर में एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत चलाया जा रहा था, जिसने हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
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इस बड़े खुलासे से बिहार पुलिस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग पर यह दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले की पूरी तह तक जाएं और सभी दोषियों को कठोरतम सजा दिलाएं। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी धांधली न हो और केवल योग्य तथा ईमानदार अभ्यर्थियों को ही पुलिस बल में सेवा का अवसर मिल सके। इस कार्रवाई से परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाली की उम्मीद जगी है।







