Muzaffarpur NEET Scam News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नीट परीक्षा के नाम पर छात्रों को ठगने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस गिरोह ने फर्जी प्रश्नपत्र और नकली सर्टिफिकेट बेचने के बहाने हजारों छात्रों से लाखों रुपये की वसूली की थी। पुलिस ने इस मामले में चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे जांच में नया मोड़ आ गया है।
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मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतिश कुमार मिश्रा ने बताया कि पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। गिरफ्तार किए गए ये चार आरोपी पहले से पकड़े गए मुख्य अभियुक्त मनीष यादव के साथ मिलकर सक्रिय थे। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था, जो छात्रों को अपने जाल में फंसाता था।
उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि गिरोह के पास नीट परीक्षा के असली प्रश्नपत्र मौजूद हैं। इसी झांसे में आकर अभ्यर्थी बड़ी रकम दे बैठते थे। हालांकि, अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों के पास वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं थे, बल्कि वे केवल छात्रों को गुमराह कर रहे थे।
फर्जी प्रश्नपत्रों का काला कारोबार: कैसे फैलाया गया जाल?
जांच अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम का बखूबी इस्तेमाल किया। टेलीग्राम पर अलग-अलग चैनल और समूह बनाकर छात्रों तक अपनी पहुंच बनाई जाती थी। इन चैनलों पर यह झूठा दावा किया जाता था कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिससे छात्रों को आसानी से सफलता मिल सके।
डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने की चाह में कई छात्र इन फर्जी दावों पर भरोसा कर लेते थे। इसके बाद उनसे बड़ी रकम की मांग की जाती थी और बदले में नकली सामग्री भेजी जाती थी। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की उम्मीदों का फायदा उठाकर पैसे कमाना था।
टेलीग्राम बना ठगी का नया अड्डा, लाखों की वसूली जारी
इस फर्जीवाड़े का पहला बड़ा खुलासा मई महीने में हुआ था, जब पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना मनीष यादव को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह संकेत मिलने लगे थे कि इस रैकेट के पीछे एक बड़ा और व्यापक नेटवर्क काम कर रहा है। एसआईटी तभी से लगातार मामले की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी।
तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के वित्तीय लेनदेन की गहन जांच के बाद पुलिस अन्य संदिग्धों तक पहुंचने में कामयाब रही। इस गिरफ्तारी से पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके ठगी के तरीकों को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिली है। यह मामला न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार में परीक्षा धोखाधड़ी (Bihar Exam Fraud News) के खिलाफ पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है।
जांच का दायरा बढ़ा: और भी कई राज्यों में लिंक?
पुलिस के अनुसार, गिरोह का प्राथमिक मकसद परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन का लालच देकर छात्रों से पैसे ऐंठना था। आरोपी अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाते थे कि उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिल जाएगा या फिर विशेष महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि, अब तक की जांच में ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के पास वास्तविक प्रश्नपत्र थे।
एसआईटी का मानना है कि यह पूरी तरह से ठगी का खेल था, जिसमें छात्रों की चिंता और भविष्य की उम्मीदों का गलत फायदा उठाया गया। मुजफ्फरपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी भी जारी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस ठगी का दायरा केवल बिहार तक ही सीमित था या फिर देश के अन्य राज्यों के छात्र भी इस धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं।
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यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा लीक होने के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 21 जून को इसकी दोबारा परीक्षा निर्धारित की है। इस महत्वपूर्ण परीक्षा को देखते हुए एनटीए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, नीट यूजी के दोबारा प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का जिम्मा भारतीय वायुसेना को सौंपा गया है, ताकि किसी भी तरह के लीक या धांधली को रोका जा सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







