Bhagalpur Revenue News: भागलपुर जिले के तिनटंगा करारी पंचायत के ग्रामीणों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब उनके राजस्व अभिलेखों को गोपालपुर अंचल में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह कदम ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग और उनकी परेशानियों को देखते हुए उठाया गया है, जिससे उन्हें सरकारी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने से मुक्ति मिलेगी। जिला प्रशासन ने इस संबंध में बिहार सरकार के राजस्व विभाग को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर ली है।
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तिनटंगा करारी: प्रशासनिक उलझन का केंद्र
तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेखों को गोपालपुर अंचल में शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। लंबे समय से ग्रामीण इस प्रशासनिक उलझन से जूझ रहे थे, जिसके कारण उन्हें विभिन्न सरकारी कामों के लिए दूर-दराज के अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। यह समस्या दशकों से स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी।
अंचलाधिकारी रंगरा चौक के अनुसार, मौजा तिनटंगा, थाना संख्या-47 के तहत तिनटंगा दियारा उत्तर, तिनटंगा दियारा दक्षिण और तिनटंगा करारी पंचायत आते हैं। भौगोलिक रूप से देखने पर तिनटंगा दियारा उत्तर और दक्षिण तो रंगरा अंचल में पड़ते हैं, लेकिन तिनटंगा करारी पंचायत स्पष्ट रूप से गोपालपुर अंचल क्षेत्र में स्थित है। यह भौगोलिक विसंगति ही सारी समस्याओं की जड़ थी।
इस विरोधाभासी स्थिति के बावजूद, तीनों पंचायतों के राजस्व अभिलेख संयुक्त रूप से तिनटंगा करारी में स्थित राजस्व कचहरी में रखे जाते थे। यह व्यवस्था पुरानी थी और इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें थीं। जब सरकार ने ऑनलाइन रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो इस संयुक्त अभिलेख प्रणाली के कारण एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। सभी रिकॉर्ड अनजाने में रंगरा चौक अंचल में अपलोड कर दिए गए, जिससे तिनटंगा करारी के ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
ग्रामीणों की दोहरी परेशानी और संघर्ष
इस त्रुटिपूर्ण ऑनलाइन अपडेट का सीधा असर तिनटंगा करारी के हजारों ग्रामीणों पर पड़ा। उन्हें अब म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), परिमार्जन (रिकॉर्ड सुधार) और भू-मापी जैसे महत्वपूर्ण ऑनलाइन राजस्व कार्यों के लिए रंगरा अंचल जाना पड़ता था। रंगरा अंचल कार्यालय उनके गांव से करीब 14 किलोमीटर दूर है, जहां पहुंचने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। उन्हें न केवल लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, बल्कि आने-जाने में पूरा दिन भी लग जाता था।
समस्या यहीं खत्म नहीं होती थी। वहीं दूसरी ओर, जाति, आय और निवास प्रमाण-पत्र जैसे आरटीपीएस (Right to Public Services) से संबंधित प्रमाण-पत्र गोपालपुर अंचल से ही बनते थे। यह अंचल उनके गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस दोहरी और असंगत व्यवस्था से आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्हें अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग अंचलों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी और उनका मनोबल गिरता था। यह स्थिति देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें गोपालपुर अंचल के लिए एक महत्वपूर्ण समाचार है और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
जिला प्रशासन का संवेदनशील फैसला
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए लगातार जिला प्रशासन से गुहार लगाई थी। उनकी मांग थी कि तिनटंगा करारी पंचायत को पूरी तरह से गोपालपुर अंचल से संबद्ध किया जाए, ताकि उन्हें एक ही जगह से सभी प्रकार की सेवाएं मिल सकें और उनकी परेशानी कम हो। जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को कई बार उच्च स्तर पर उठाया था, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा।
जिला प्रशासन भागलपुर ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान लिया और ग्रामीणों की मांग को उचित मानते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेखों को गोपालपुर अंचल में स्थानांतरित करने की पूरी प्रक्रिया और उसके औचित्य का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस प्रस्ताव को अब राजस्व विभाग, बिहार सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। यह फैसला सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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नई व्यवस्था से मिलेगी बड़ी राहत
इस प्रस्ताव को राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद, तिनटंगा करारी पंचायत के राजस्व अभिलेखों को विधिवत रूप से गोपालपुर अंचल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे ग्रामीणों को अब अपने सभी प्रकार के राजस्व संबंधी कार्यों के लिए सिर्फ एक ही अंचल कार्यालय जाना होगा। यह न केवल उनकी यात्रा की परेशानी को कम करेगा, बल्कि उनके समय और पैसे की भी भारी बचत होगी। सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और बिचौलियों की अनावश्यक भूमिका पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
इस ऐतिहासिक फैसले से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देगी और उनकी वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे आम जनता को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने में अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी।







