Madhubani News: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त कार्रवाई में मधुबनी जिले से एक मदरसा शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। पंडौल थाना क्षेत्र के निवासी इजहार उल हक पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा होने और भारत में स्लीपर सेल तैयार करने का आरोप है। इसके साथ ही उस पर कथित तौर पर विदेशी फंडिंग का इंतजाम करने का भी आरोप है।
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सोमवार दोपहर दिल्ली से पहुंची NIA, पटना और भोपाल से आई ATS टीम के साथ स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। भौआड़ा गांव स्थित एक मस्जिद से इजहार उल हक को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे एक गोपनीय स्थान पर ले जाकर विभिन्न एजेंसियों द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है।

लश्कर-ए-तैयबा कनेक्शन और फंडिंग
जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि शुरुआती पड़ताल में आरोपी के कुछ विदेशी संपर्कों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आई है। एजेंसियां अब यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और देश के अन्य राज्यों में कितने लोग इससे जुड़े हुए हैं। इस मामले में अब तक कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें भोपाल से फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह, उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला और राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव शामिल हैं। शाकिर मेव पर संगठनात्मक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।
सोशल मीडिया पर युवाओं की कट्टरपंथी विचारधारा
पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि इजहार उल हक मदरसा शिक्षक है और मधुबनी में किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल ले जाने की तैयारी कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स का इस्तेमाल युवाओं को जोड़ने और उन्हें कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने के लिए किया जा रहा था।
एजेंसियां अब मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की बारीकी से जांच कर रही हैं। फराज के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, विदेशी संपर्कों और फंडिंग चैनलों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
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सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। NIA, ATS और स्थानीय पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।








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