Gopalganj News: बिहार के गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड स्थित कहला-पीपरहियां गांव के पास सारण मुख्य नहर का तटबंध अचानक ध्वस्त हो गया। इस घटना से नहर का तेज पानी तेजी से कृषि क्षेत्रों में फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 500 एकड़ में लगी फसलें जलमग्न हो गईं। यह हादसा स्थानीय किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर आया है।
किसानों पर टूटा कहर, 500 एकड़ फसल बर्बाद
तटबंध टूटने से किसानों की कमर टूट गई है। खेतों में पानी भर जाने से धान के बिचड़े और हाल ही में बोई गई सीधी बुआई वाली फसलें पूरी तरह से डूब चुकी हैं। किसानों को डर है कि यदि पानी की निकासी जल्द नहीं हुई, तो उनकी महीनों की कड़ी मेहनत और पूंजी बर्बाद हो जाएगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर और अथक परिश्रम से धान की बुआई की थी, लेकिन अब उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।




गंडक परियोजना के अभियंता दिलीप कुमार ने बताया कि नहर में फिलहाल लगभग एक हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है तथा आवश्यकता के अनुसार इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बांध की मरम्मती के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई जा रही है और देर रात तक टूटे हिस्से को बंद करने का प्रयास किया जाएगा।
लापरवाही का आरोप और प्रशासनिक दावे
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग की घोर लापरवाही और समय पर तटबंधों की मरम्मत न होने के कारण यह हादसा हुआ है। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम और विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों की सहायता से पानी के बहाव को रोकने और तटबंध की मरम्मत के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन पानी का भारी दबाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बांध में दरार आने के बाद पानी का बहाव इतना तीव्र था कि देखते ही देखते सैकड़ों बीघे में लगी धान की बिचड़े, सब्जियां और अन्य फसलें जलमग्न हो गईं। किसानों ने खून-पसीना एक करके और कर्ज लेकर फसलें बोई थीं, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। खेतों में कई फीट पानी जमा होने से फसलों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
मुआवजे की मांग और आगे की चुनौती
प्रशासन और जल संसाधन विभाग के प्रति किसानों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर पानी का बहाव तुरंत नहीं रोका गया, तो रिहायशी इलाकों में भी पानी घुस जाएगा। पीड़ित किसानों ने सरकार से अनुरोध किया है कि नष्ट हुई फसलों का उचित आकलन करवाकर उन्हें अविलंब मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस भारी आर्थिक नुकसान से उबर सकें।
फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें प्रशासनिक मदद पर टिकी हैं कि कब इस पानी के बहाव को नियंत्रित कर उन्हें इस बड़ी आपदा से मुक्ति दिलाई जाती है। गंडक विभाग के अधिकारियों का दावा है कि नहर में क्षमता से अधिक पानी पहुंचने के कारण दबाव बढ़ा, जिससे बांध टूट गया।







