Motihari Canal Encroachment: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मोतीझील नहर पर हुए अतिक्रमण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में मोतिहारी नगर निगम से जवाब तलब किया है और उसे छह सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह नहर मोतिहारी शहर के लिए पेयजल आपूर्ति और जल निकासी का महत्वपूर्ण साधन है, जिस पर बढ़ते अतिक्रमण से इसकी उपयोगिता प्रभावित हो रही है।
मोतीझील नहर: शहर की जीवनरेखा पर संकट
पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मोतीझील नहर के अतिक्रमण से जुड़े मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि यह नहर लगभग 11 किलोमीटर लंबी है, जो मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट से जोड़ती है। इस नहर को शहर की ‘जीवनरेखा’ कहा जाता है, क्योंकि यह न केवल पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है, बल्कि बारिश के मौसम में जल निकासी में भी अहम भूमिका निभाती है। नहर पर लगातार हो रहे अतिक्रमण से इसकी चौड़ाई घट रही है और बहाव भी बाधित हो रहा है, जिससे शहर में जल संकट और जलजमाव का खतरा बढ़ रहा है।




मोतिहारी नगर निगम को मोतीझील नहर अतिक्रमण मामले में छह सप्ताह के भीतर कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा। इससे पहले, कोर्ट ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी से भी इस मामले में विस्तृत हलफनामा मांगा था।
कोर्ट ने मांगा विस्तृत हलफनामा
अदालत ने मोतिहारी नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह अतिक्रमण के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट और हलफनामा प्रस्तुत करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूर्व में भी, न्यायालय ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी से इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत जानकारी मांगी थी। नगर निगम को अब यह बताना होगा कि अतिक्रमण हटाने और नहर के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उठाए जाने वाले हैं।
अगली सुनवाई का इंतजार
पटना हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की है। नगर निगम द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे के आधार पर ही कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट के इस हस्तक्षेप से मोतीझील नहर पर हुए अतिक्रमण को हटाया जा सकेगा और मोतिहारी शहर की इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को बचाया जा सकेगा।







