Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित आरडीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. केपी ठाकुर का बुधवार को मुंबई में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। शिक्षकों, पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों ने इसे शिक्षा क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है, जिससे पूरे बिहार में गहरा दुख व्याप्त है।
एक युग का अंत: शिक्षा जगत में अपूरणीय क्षति
डॉ. केपी ठाकुर का आरडीएस कॉलेज से लंबा जुड़ाव रहा था, जहां उन्होंने अपनी विद्वता और शैक्षणिक योगदान से एक अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा और व्याकरण के क्षेत्र में उनकी गहरी पहचान थी। उन्होंने अपने शिक्षण के माध्यम से हजारों छात्रों के जीवन को सही दिशा प्रदान की। उनके निधन की सूचना के बाद, शिक्षा समुदाय के विभिन्न वर्गों से गहरी संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।




अंग्रेजी व्याकरण के क्षेत्र में अमूल्य योगदान
डॉ. केपी ठाकुर की पहचान सिर्फ एक शिक्षक या प्राचार्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि अंग्रेजी भाषा शिक्षण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी लिखी दो पुस्तकें, ‘A Practical Guide to English Grammar’ और ‘A Practical Guide to English Translation and Composition’, बिहार सहित पूरे देश के छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं। ये पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं और अकादमिक अध्ययन के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती थीं, जिससे वे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन गई थीं।
आरडीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ने डॉ. केपी ठाकुर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “उनके निधन से पूरा कॉलेज परिवार स्तब्ध है। इस दुख की घड़ी में कॉलेज परिवार उनके परिजनों के साथ खड़ा है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है।”
आरडीएस कॉलेज और विश्वविद्यालय परिवार की भावभीनी श्रद्धांजलि
डॉ. केपी ठाकुर के निधन पर विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनीता सिंह, पूर्व प्रॉक्टर डॉ. वीएस राय, डॉ. नीलिमा झा, डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता, सीनेटर डॉ. संजय कुमार सुमन, डॉ. एमएन रजवी, डॉ. आरती कुमारी और डॉ. ललित किशोर सहित कई शिक्षाविदों ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। सभी ने उनके शैक्षणिक योगदान को याद किया और कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो समृद्ध विरासत छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेगी।
डॉ. केपी ठाकुर भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी पुस्तकें, उनका शैक्षणिक योगदान और विद्यार्थियों को दी गई सीख उन्हें हमेशा जीवित रखेगी। बिहार के शैक्षणिक जगत में उनका नाम सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता रहेगा। उनके जाने से अंग्रेजी शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र में एक ऐसा रिक्त स्थान उत्पन्न हो गया है, जिसकी भरपाई करना अत्यंत कठिन होगा।







