Bihar Land Acquisition: बिहार में सड़क, नेशनल हाईवे (NH), रेलवे और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के कार्यों में अब किसी भी प्रकार की देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भू-अर्जन से जुड़े सभी अधिकारियों, प्रमंडलीय आयुक्तों से लेकर जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों तक, की जवाबदेही तय की जाएगी।
मंत्री डॉ. जायसवाल ने गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ एक प्रमंडलवार समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने 349 भू-अर्जन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और एमआइएस (MIS) आधारित ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से सभी लंबित मामलों को तुरंत निपटाने का आदेश दिया। उनका यह रुख राज्य में विकास परियोजनाओं की गति को तेज करने और भूमि मालिकों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।




जमीन अधिग्रहण में अब नहीं होगी देरी, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
मंत्री ने बैठक के दौरान बताया कि राज्य में कुल 349 विकास परियोजनाओं के लिए अब तक 45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इन परियोजनाओं से प्रभावित हुए भूमि मालिकों (रैयतों) को मुआवजे के तौर पर 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राज्य में विकास परियोजनाओं की सफलता और रफ्तार सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि वहां जमीन अधिग्रहण का काम कितनी तेजी और पारदर्शिता से हो रहा है।
“विकास परियोजनाओं की रफ्तार सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि वहां जमीन अधिग्रहण का काम कितनी तेजी से हो रहा है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” – डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री
किस प्रमंडल को कितना मुआवजा मिला?
समीक्षा बैठक में सभी नौ प्रमंडलों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के भुगतान का विस्तृत आंकड़ा प्रस्तुत किया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में विकास परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहित की गई है और रैयतों को पर्याप्त मुआवजा भी दिया गया है।
पटना प्रमंडल: 66 परियोजनाओं के लिए 8023 एकड़ भूमि के अर्जन पर 9502 करोड़ रुपये दिए गए.
तिरहुत प्रमंडल: 91 परियोजनाओं के लिए 12540 एकड़ भूमि पर 6692 करोड़ रुपये मिले.
पूर्णिया प्रमंडल: 46 परियोजनाओं के लिए 6762 एकड़ भूमि पर 3517 करोड़ रुपये जारी हुए.
मगध प्रमंडल: 29 परियोजनाओं के लिए रैयतों को 3534 करोड़ रुपये दिए गए.
सारण प्रमंडल: 21 परियोजनाओं के लिए 1782 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए.
दरभंगा प्रमंडल: 28 परियोजनाओं के लिए 1685 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ.
मुंगेर प्रमंडल: 35 परियोजनाओं के लिए 1409 करोड़ रुपये जारी किए गए.
भागलपुर प्रमंडल: 13 परियोजनाओं के लिए 1049 करोड़ रुपये दिए गए.
कोसी प्रमंडल: 20 परियोजनाओं के लिए 915 करोड़ रुपये रैयतों के भुगतान के लिए मिले.
हर महीने होगी समीक्षा, लापरवाही पर कार्रवाई
मंत्री डॉ. जायसवाल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने स्तर पर हर महीने भू-अर्जन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित करें। जिला भू-अर्जन अधिकारियों को यह भी आदेश दिया गया है कि वे प्रत्येक परियोजना की प्रगति की जानकारी को सार्वजनिक करें और एमआइएस पोर्टल पर डेटा को नियमित रूप से अपडेट करें। राज्य मुख्यालय से अब इन सभी परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी और अधिक सख्ती से की जाएगी। यदि आंकड़ों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कार्य में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों से तुरंत जवाब-तलब किया जाएगा और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम बिहार लैंड एक्विजिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए उठाया गया है।







