Bihar Mela: संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने इस साल मेलों के आयोजन पर बड़ा खर्च करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस मद में कुल 8 करोड़ 24 लाख रुपये आवंटित किए हैं। इसमें अकेले श्रावणी मेला के लिए पौने तीन करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जो भक्तों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
श्रावणी और मलमास मेले को मिली प्राथमिकता
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हाल ही में इस आवंटन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह राशि उन जिलों को भेजी गई है, जहाँ इन प्रमुख मेलों का आयोजन होना है। आवंटित राशि में चार महत्वपूर्ण मेलों को प्राथमिकता मिली है। राजगीर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध मलमास मेला के लिए 4 करोड़ 85 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके अलावा, दरभंगा में होने वाले वीर लौरिक मेला और रामनवमी मेला के लिए भी अलग से राशि का प्रावधान किया गया है।






मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया, ‘राज्यभर में प्रत्येक वर्ष करीब चार दर्जन मेलों का आयोजन होता है। इनमें कुछ मेले विशेष अवसर या महत्व को लेकर आयोजित किए जाते हैं। एक दर्जन से अधिक मेलों को राजकीय मेला का दर्जा भी प्राप्त है। पर्यटन विभाग के स्तर से कुछ मेलों का आयोजन होता है, लेकिन अन्य सभी मेलों का आयोजन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर से होता है।’
मेलों पर खर्च का विवरण
| मेला का नाम | आवंटित राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| श्रावणी मेला | 2.75 |
| राजगीर मलमास मेला | 4.85 |
| वीर लौरिक मेला (दरभंगा) | अलग से आवंटित |
| रामनवमी मेला (दरभंगा) | अलग से आवंटित |
यह राशि सीधे उन जिलों को भेजी गई है जहां इन मेलों का आयोजन होता है, जिससे स्थानीय प्रशासन को तैयारी और व्यवस्था में मदद मिलेगी। इस पहल से न केवल सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मेले से जुड़े छोटे व्यापारियों और कलाकारों को भी आर्थिक संबल प्राप्त होगा।
सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक संबल
बिहार में हर साल लगभग चार दर्जन मेलों का आयोजन होता है, जिनमें से एक दर्जन से अधिक को राजकीय मेला का दर्जा प्राप्त है। ये मेले न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की यह पहल मेलों को भव्यता के साथ आयोजित करने और उनसे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने में सहायक होगी। सरकार का यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस वित्तीय सहायता से मेलों में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे बिहार की छवि एक सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और निखरेगी।








