Bihar Electricity: पिछले दो दशकों में बिहार ने बिजली के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 2005 के 75 यूनिट से बढ़कर 2026 में 401 यूनिट तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बिजली की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विस्तार और उपभोक्ता मांग में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जिससे आम लोगों को सीधा फायदा हुआ है।
प्रति व्यक्ति बिजली खपत में रिकॉर्ड वृद्धि
राज्य ऊर्जा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में बिजली की खपत लगातार बढ़ी है। 2012 में प्रति व्यक्ति खपत 134 यूनिट थी, जो 2026 तक 401 यूनिट हो गई है। प्रति व्यक्ति बिजली खपत कुल उपयोग की गई बिजली को उपभोक्ताओं की संख्या से विभाजित करके मापी जाती है, जो राज्य में बढ़ती समृद्धि और पहुंच का संकेत है।






हर घर बिजली योजना का असर, 2.22 करोड़ उपभोक्ता
बिहार ने अक्टूबर 2018 में ‘हर घर बिजली’ योजना के तहत सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया था। इस योजना के कारण विद्युतीकृत गांवों की संख्या 2005 के 14,020 से बढ़कर 2026 में 39,073 हो गई है। उपभोक्ताओं की संख्या भी 2005 के 17.3 लाख से बढ़कर 2026 में 2.22 करोड़ हो गई है, जो बिजली तक व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में अब प्रतिदिन औसतन 23 से 24 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि 2005 में यह 10 से 12 घंटे थी। ग्रामीण इलाकों में भी बिजली आपूर्ति 5-6 घंटे से बढ़कर 22 से 23 घंटे हो गई है।
राज्य में लगभग 90 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल रही है।
मुफ्त बिजली और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर
बिजली की बढ़ी हुई उपलब्धता ने राज्य सरकार को 1.86 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने में सक्षम बनाया है। यह योजना जुलाई 2025 से लागू है और अभी भी जारी है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिली है।
राज्य ने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने ट्रांसमिशन और वितरण बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया है।
- ग्रिड सब-स्टेशनों (GSS) की संख्या 2005 के 45 से बढ़कर 2026 में 175 हो गई है।
- पावर सब-स्टेशनों (PSS) की संख्या इसी अवधि में 368 से बढ़कर 1,283 हो गई है।
- वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या 380,185 तक पहुंच गई है।
- ट्रांसमिशन लाइनें 21,822 सर्किट किलोमीटर तक विस्तारित हुई हैं।
4 जुलाई 2026 को बिहार ने 9,426 मेगावाट की अपनी अब तक की सबसे अधिक बिजली निकासी दर्ज की। यह पिछले साल के 8,822 मेगावाट के रिकॉर्ड को तोड़ता है और 2012 के 1,751 मेगावाट की तुलना में भारी वृद्धि है। पटना में भी 21 जून 2026 को 933 मेगावाट की चरम मांग दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार बिजली के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजरा है। बेहतर बुनियादी ढांचा, चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता और मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं राज्य के विकास को गति दे रही हैं और लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार कर रही हैं। भविष्य में यह मजबूत नेटवर्क राज्य की औद्योगिक और कृषि वृद्धि में और भी सहायक होगा।








