Bihar Mid-Day Meal: बिहार के दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित बिहार के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय माधोपुर में बच्चों के मध्यान भोजन में छिपकली मिलने की गंभीर घटना के बाद हड़कंप मच गया है। गत बुधवार को हुई इस घटना में लगभग एक दर्जन बच्चे बीमार पड़ गए। इस मामले ने मिड-डे मील योजना में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी जांच के लिए अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार झा ने त्रि-सदस्यीय समिति का गठन किया है।
माधोपुर स्कूल में जांच, एकता फाउंडेशन सवालों के घेरे में
छिपकली मिलने के मामले ने जब तूल पकड़ा, तो अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार झा द्वारा नामित त्रि-सदस्यीय जांच समिति शुक्रवार को उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय माधोपुर पहुंची। समिति ने प्रधानाध्यापक, शिक्षक, रसोईया और बीमार पड़े बच्चों से गहन पूछताछ की। इसके साथ ही, विद्यालय के किचन शेड का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। जांच टीम ने एकता फाउंडेशन द्वारा धरौरा दरभंगा पथ के माधोपुर के समीप निर्मित किचन शेड का भी जायजा लिया, जहां खाना बनाने से लेकर पैक करने तक की प्रक्रिया की विस्तृत जांच की गई।






मिड-डे मील में भ्रष्टाचार का पुराना ‘खेल’, बच्चों की सेहत से खिलवाड़
एकता फाउंडेशन, जिसे स्कूली बच्चों के बीच भोजन परोसने का दायित्व मिला है, अपने शुरुआती चरण से ही विवादों में रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार, मिड-डे मील योजना अपने प्रारंभिक दौर से ही अनियमितता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रही है। पहले विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनियमितता बरतते थे, और अब यह दायित्व संभाल रहा एकता फाउंडेशन भी विवादों से घिरा है। भोजन में दाल की मात्रा में कमी, नाम मात्र की सब्जी या चोखा, कीड़े मिलना, सड़े अंडे और सड़े फल की आपूर्ति जैसी शिकायतें आम बात हो गई हैं। यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
क्या बड़ी मछलियां बच जाएंगी या होगा न्याय?
यह आरोप भी लगते रहे हैं कि इन अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में केवल आपूर्तिकर्ता ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग से लेकर योजना संचालित करने वाले हर पदाधिकारी का गहरा नाता रहा है। इसी कारण अक्सर शिक्षकों या रसोईया पर ठीकरा फोड़ दिया जाता है। इस बार इतनी बड़ी घटना के बाद भूमि सुधार उप समाहर्ता अविनाश कुमार सिंह, सहायक निर्वाचन पदाधिकारी सुदीप शंकर झा और प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रूपेश राय ने स्थानीय स्तर पर सभी पहलुओं की जांच की है। वे अनुमंडल पदाधिकारी को विस्तृत जांच प्रतिवेदन सौंपेंगे, जिसके बाद ही वास्तविक दोषियों का पता चल पाएगा। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन बच्चों के भविष्य के लिए कोई ठोस कदम उठाता है, या हमेशा की तरह ‘बड़ी मछली’ को बचाने के लिए ‘छोटी मछली’ को बलि का बकरा बनाया जाएगा।







