Darbhanga Maa Shyama Mandir: बिहार के दरभंगा स्थित प्रसिद्ध मां श्यामा मंदिर में भक्तों द्वारा दान किए गए सोने और चांदी के गहनों का वजन पारदर्शिता के साथ किया गया है. यह प्रक्रिया दंडाधिकारी की नियुक्ति के बाद उनकी कड़ी निगरानी में पूरी की गई, जिससे मंदिर न्यास समिति के कामकाज में जवाबदेही और स्पष्टता सुनिश्चित हुई.







मां श्यामा मंदिर न्यास समिति के परिसर में दान पेटी और काउंटर से प्राप्त सभी सफेद व पीले धातु के गहनों को विधिवत गलाया गया. इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) राकेश कुमार को दंडाधिकारी नियुक्त किया गया था, जबकि सुश्री प्रियंका सहायक दंडाधिकारी के रूप में मौजूद थीं. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय थाना की पुलिस बल भी तैनात रही.

दंडाधिकारी की निगरानी में पिघले लाखों के गहने
शुक्रवार की सुबह 11 बजे से देर शाम तक चले इस अभियान में डगरू सेठ ज्वेलर्स के संतोष लाठ की टीम ने तकनीकी जांच में सहयोग किया. सभी गहनों की शुद्धता की जांच करने के बाद उन्हें लैब में गलाकर टुकड़ों के रूप में परिवर्तित किया गया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान न्यास के अध्यक्ष प्रो एस एम झा, उपाध्यक्ष पंडित कमला कांत झा, प्र सह सचिव मधुबाला सिन्हा, कोषाध्यक्ष सह प्रखंड विकास पदाधिकारी (सदर) रविरंजन कुमार, सदस्य डॉ संतोष कुमार पासवान, पूर्व सह सचिव सह सदस्य श्री श्रीपति त्रिपाठी और प्र प्रबंधक रमानाथ झा उपस्थित रहे.
जेवर गलाने के उपरांत 1369 ग्राम चांदी और 59.819 ग्राम सोना का प्रमाण सहित अभिरक्षा में रखवाया गया. हालांकि, सभी गहनों की गणना और गलाने का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है, जिसके लिए अगली तिथि जल्द ही निर्धारित की जाएगी.
मंदिर न्यास की बढ़ी जवाबदेही
कोषाध्यक्ष रविरंजन कुमार ने पिघले हुए धातु को उपाध्यक्ष पंडित कमला कांत झा की मौजूदगी में प्रभारी प्रबंधक रमानाथ झा की अभिरक्षा में सुरक्षित रखवाया. इस पहल से मंदिर के प्रति भक्तों का विश्वास और मजबूत हुआ है, क्योंकि दान में मिली बहुमूल्य धातुओं का हिसाब-किताब अब पूरी तरह से पारदर्शी हो गया है. न्यास समिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शेष बचे गहनों का मूल्यांकन भी इसी तरह की कठोर निगरानी में किया जाएगा.









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