Bihar Food Safety Officers: खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बिहार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य में पहली बार सात नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को पदोन्नति देकर ‘डेजिगनेटेड ऑफिसर’ (अभिहित अधिकारी) बनाया गया है। इस निर्णय से विभागीय कार्यों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है, साथ ही अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
यह पहली बार है, जब नियमित खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को डेजिगनेटेड ऑफिसर के पद पर पदोन्नत किया गया है। इससे पहले अधिकांश अधिकारी सहायक अभिहित अधिकारी के पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते थे।
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किन अधिकारियों को मिला पदोन्नति का लाभ?
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन अधिकारियों को डेजिगनेटेड ऑफिसर के पद पर पदोन्नत किया गया है, उनमें विभिन्न जिलों के अनुभवी खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। यह पदोन्नति उनके दीर्घकालिक अनुभव और सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
- पटना से मुकेश जी कश्यप, अशोक कुमार सिन्हा और जितेंद्र कुमार
- मुंगेर से अनिल कुमार
- औरंगाबाद से नारायण राम
- जहानाबाद से सुदामा प्रसाद
- एक अन्य अधिकारी भी इस सूची में शामिल हैं, जिनकी पदोन्नति हुई है।
यह पदोन्नति खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करने और विभागीय दक्षता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। इन अधिकारियों पर अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
बिहार फूड सेफ्टी में क्यों है यह ऐतिहासिक फैसला?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला बिहार के खाद्य सुरक्षा विभाग के इतिहास में एक मील का पत्थर है। पहले, नियमित खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को डेजिगनेटेड ऑफिसर के पद तक पहुंचने का अवसर कम ही मिलता था। अधिकांश अधिकारी सहायक अभिहित अधिकारी के पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते थे, जिससे उनके करियर में आगे बढ़ने की संभावनाएं सीमित थीं। इस नई पहल से अधिकारियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविदा विस्तार पर कार्यरत अधिकारी अजय कुमार को इस पदोन्नति का लाभ नहीं मिला है, क्योंकि वे नियमित सेवा का हिस्सा नहीं हैं। इस निर्णय से बिहार फूड सेफ्टी अधिकारियों के बीच एक सकारात्मक माहौल बनेगा और वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन और भी अधिक लगन से कर पाएंगे। आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार होगा।













